दिल्ली में शिवा-जुल्फिकार-त्यागी एक साथ काम करते थे, फिर कपिल मिश्रा जैसे दंगाई आ गए
मुकुल सिंह चौहान भीड़ जब हिंसक हो जाती है तो वो इंसान नहीं रहती उसकी इंसानियत खत्म हो जाती है, सारी गणित बस नुकसान करने तक सीमित हो जाती है। शायद दिमाग काम करना बंद कर देता है वरना प्यार से रहने वाले लोग किसी नेता या दंगाई के भड़का देने से भड़क कैसे सकते … Read more