अगर कपिल मिश्रा पर कार्रवाई नहीं करनी है तो फिर उन्हें दिल्ली पुलिस समेत तीनों सेनाओं का प्रमुख ही बना दिया जाए। नंगा नाचना ही है तो खुलकर नाचिए न सर!
अब जनता को जुटाकर प्रदर्शन रोकना, पुलिस को धमकी देना, प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हमला करना, कानून व्यवस्था देखना ये सब कपिल मिश्रा का ही काम है। वही तय करेंगे कि कौन प्रदर्शन करे और कौन न करे। घोषणा कर दीजिए कि कानून व्यवस्था, अदालत, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस कपिल मिश्रा की दासी है। जनता भी क्यों भरम में रहे?
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कपिल मिश्रा का 4 दिनों से विरोध हो रहा है लेकिन उनकी भूमिका पर अंकुश नहीं लगाया गया। वह ट्विटर पर सहानुभूति बटोर रहा है। हाईकोर्ट में आधी रात को सुनवाई हुई, अभी फिर हो रही है, कोर्ट उसकी भूमिका को लेकर पुलिस को फटकार लगा रहा है।
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उसी की पार्टी के दो दो नेता कह रहे हैं कि उस पर कार्रवाई हो, लेकिन पांच पांच घंटे लंबा भाषण देने वाले मुंह में मलाई दबाए मौन हैं और खून खराबा देखकर आह्लादित हो रहे हैं।
अब कपिल मिश्रा का कैरियर चमकेगा, जैसे गुजरात और मुजफ्फरनगर के आरोपियों का चमका। जेड सिक्योरिटी पाएगा और मंतरी बनेगा। दुखद तो यह है कि लोगों की आंख में मांस उग आया है, उन्हें सही गलत समझ मे नहीं आ रहा है।
( ये लेख कृष्णकांत के फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है )
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