तीन तलाक को राजनीतिक दल सियासी चश्मे से ना देखें। यह धर्म और सियासत का मुद्दा नहीं है। नारी के सम्मान,गरिमा और न्याय का मामला है। हम मुस्लिम बहनों को ऐसे नहीं छोड़ सकते ऐसी भूमिका स्पष्ट करते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि २० मुस्लिम देशों में भी इस तलाक पर पाबंदी है।
नई दिल्ली : तीन तलाक को राजनीतिक दल सियासी चश्मे से ना देखें। यह धर्म और सियासत का मुद्दा नहीं है। नारी के सम्मान,गरिमा और न्याय का मामला है। हम मुस्लिम बहनों को ऐसे नहीं छोड़ सकते ऐसी भूमिका स्पष्ट करते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि २० मुस्लिम देशों में भी इस तलाक पर पाबंदी है।
लोकसभा में तीन तलाक बिल पर जारी चर्चा के दौरान उन्होंने आगे कहा कि हम तीन तलाक पर महिलाओं को न्याय दिला कर रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले और राष्ट्रपति के अध्यादेश के बाद भी महिलाएँ सुरक्षित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने भी तीन तलाक को संविधान के खिलाफ बताया है। सभी राजनीतिक दल एक स्वर में तीन तलाक बिल को पास करे। ये मामला न्याय और सम्मान से जुड़ा हुआ है।
विपक्ष ने इसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दिए कश्मीर और प्रधानमंत्री मोदी से संबंधी बयान से ध्यान भटकाने की कोशिश कहा । एनडीए की सहयोगी जेडीयू भी इस बिल का विरोध करेंगी। जेडीयू का कहना है कि सरकार ने इस बिल पर ठीक से चर्चा नहीं की।
मई में मोदी सरकार ने अपना दूसरा कार्यभार संभालने के बाद संसद के इस पहले सत्र में सबसे पहले इस विधेयक का मसौदा पेश किया था। कई विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध किया है लेकिन सरकार का यह कहना है कि यह विधेयक लैंगिक समानता और न्याय की दिशा में एक कदम है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक ने मांग की हैं कि इसे जांच पड़ताल के लिए संसदीय समिति को सौंपा जाए।
लोकसभा में भाजपा का बहुमत होने के कारण यह बिल इस सदन में तो पास हो जाएगा लेकिन राज्यसभा में भाजपा का बहुमत नहीं होने और राजग (एनडीए) के कुछ दल इस दल के विरोध में होने के कारण वहाँ इस बिल को पास करने में कठिनाई होने के आसार है।
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