مہاتما کے مذہب کا کیا مطلب تھا

ان کے لئے مذہب قومیت نہیں تھا۔ تمام شہری بلاتفریق عقائد‘ ہندوستان پر ان کا حق تھا حالانکہ ایک دھرمک ویشناوی گھر انے میں بڑے ہوئے موہن داس راج کورٹ کے الفریڈ ہائی اسکول میں تعلیم کے دوران آخری سال میں ایک ناستک تھے۔ اپنی اٹوبایو گرافی کے الفاظ میں انہوں نے ”ناستک کے صحرا … Read more

इजरायली सैनिकों ने फिलिस्तीनी रिहायशी मकानों को ध्वस्त कर जश्न मनाया

सोमवार सुबह के शुरुआती घंटों में, इजरायल के सशस्त्र बलों ने 1967 के बाद से वादी हुमुस में, यरूशलेम के दक्षिण-पूर्व में फिलीस्तीनी सुर बाहेर पड़ोस में अपना सबसे बड़ा विध्वंसकारी कार्य शुरू किया। फिलिस्तीनियों और अंतर्राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ का विरोध करने का प्रयास किया, जिसके लिए की पिटाई से दर्जनों रिपोर्टिंर को चोटें … Read more

आसियान अब म्यांमार के अत्याचारों से मुंह नहीं मोड़ सकता

25 अगस्त, 2017 को म्यांमार के उत्तरी रखीन राज्य में लड़ाकू विमानों ने सुरक्षा ठिकानों पर हमला करने के बाद, म्यांमार की सेना ने हजारों रोहिंग्या नागरिकों की हत्या किया और उन्हें उकसाया, सैकड़ों महिलाओं और लड़कियों के साथ बलात्कार किया और पूरे गाँव को जला दिया। सैन्य-नेतृत्व वाले “क्लीयरेंस ऑपरेशन” के लगभग दो साल … Read more

शीलाजी प्रधानमंत्री के लायक थीं!

श्रीमती शीला दीक्षित बीमार थीं और काफी कमजोर हो गई थीं। लेकिन ऐसी संभावना नहीं थी कि वे अचानक हमारे बीच से महाप्रयाण कर जाएंगी। आज अखबारों और टीवी चैनलों ने जिस तरह की भाव-भीनी विदाई उन्हें दी है, बहुत कम नेताओं को दी जाती है। जब वे दिल्ली की पहली बार मुख्यमंत्री बनीं तब … Read more

वेदप्रताप वैदिक के लेख का वरिष्ठ पत्रकार क़ुरबान अली ने दिया जवाब

12-13, जुलाई को दिल्ली में हुए समाजवादी समागम में आरएसएस समर्थक पत्रकार वेदप्रताप वैदिक भी पहुंचे लेकिन जब वहां उन्होंने आरएसएस की तारीफ़ों के पुल बांधने शुरू कर दिए तो मजबूरन मुझे उन्हें रोकना पड़ा। इतना ही नहीं बाद में उन्होंने इस प्रकरण पर एक लेख भी लिख दिया जिसका जवाब भी मुझे लिखना पड़ा। … Read more

जम्मू-कश्मीर में न्याय क्यों मायने रखता है

इसके बारे में सोचें कि जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के दुरुपयोग के आरोपों को हर बार भारत क्यों झेलता है? क्या इसलिए कि आरोपों में कुछ सच्चाई है? क्या भारत में छिपाने के लिए बहुत कुछ है जब वह अपने पुरुषों द्वारा वर्दी में किए गए उल्लंघन की बात करता है? संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त मानवाधिकार … Read more

‘‘सलाम करो, उस लड़के को!’’

कल कुछ समाजवादी साथियों ने दिल्ली में दो दिन का समाजवादी समागम आयोजित किया था। देश भर से लगभग 150-200 ऐसे समाजवादी इकट्ठे हुए थे, जो देश की वर्तमान राजनीतिक दशा से चिंतित थे और कुछ पहल करने का विचार कर रहे थे। दूसरे दिन के सत्र में श्री रमाशंकरसिंह और श्री सुनीलम ने मुझे … Read more

सत्ता सत्य है, राजनीति मिथ्या

इस सप्ताह कर्नाटक और गोवा में जो कुछ हो रहा है, उसने सारे देश को वेदांती बना दिया है। वेदांत की प्रसिद्ध उक्ति है- ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या- याने ब्रह्म ही सत्य है, यह जगत तो मिथ्या है। दूसरे शब्दों में सत्ता ही सत्य है, राजनीति मिथ्या है। सत्ता ही ब्रह्म है, बाकी सब सपना है। … Read more

विश्लेषण: गोवा उपचुनावों के नुकसान ने मौजूदा उथल-पुथल के बीज बो दिए!

कांग्रेस की गोवा इकाई में मौजूदा उथल-पुथल के बीज तब बोए गए जब पार्टी ने चार में से तीन विधानसभा उपचुनाव हारे, जिनके परिणाम 23 मई को लोकसभा चुनाव परिणाम के साथ-साथ घोषित किए गए थे। कांग्रेस में असंतोष को देखते हुए और अपनी निर्भरता को झटका देने के लिए उत्सुक सहयोगी दलों पर, भारतीय … Read more

मुकाबला : क्या देश में वाकई डर का माहौल है?

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने अपने एक भाषण में कहा है कि भारत चार धर्मों की जननी है और धार्मिक आजादी के बचाव के लिए हमें आगे आना चाहिए. अेमेरिका में ही जारी इंटरनेशनल फ्रीडम रिपोर्ट तो एक कदम और आगे चली जाती है. यह बीजेपी के नेताओं की बयानबाजी को जिम्मेदार ठहरा … Read more

भौंसला से सीखे सारा देश

हरयाणा में जींद के पास एक गांव है, भौंसला। इस गांव में आस-पास के 24 गांवों की एक पंचायत हुई। यह सर्वजातीय खेड़ा खाप पंचायत हुई। इसमें सभी गांवों के सरपंचों ने सर्वसम्मति से एक फैसला किया। यह फैसला ऐसा है, जो हमारी संसद को, सभी विधानसभाओं को और देश की सभी पंचायतों को भी … Read more

मायामुक्त अखिलेश

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन यदि चुनावी हार के बाद भी चलता रहता तो मुझे आश्चर्य होता। अब उत्तरप्रदेश की ये दोनों प्रमुख पार्टियां उप्र विधानसभा के 13 उप-चुनाव अलग-अलग लड़ेंगी और हो सकता है कि एक-दूसरे से टक्कर लेते हुए भी लड़ें। खुशी की बात यह है कि मायावती और अखिलेश … Read more

बेरोजगारी की आंच के बावजूद BJP की बंपर जीत कैसे?

नैशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि 2017-18 में बेरोजगारी दर 6.1 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर पर चली गई। साल 2011-12 में यह 2.2 प्रतिशत पर थी। एनएसएसओ का दावा है कि बेरोजगारी दर बढ़ने की एक वजह गणना का बदला हुआ तरीका है। इसमें शिक्षित लोगों को ज्यादा … Read more