महिला दिवस विशेषः समय के इस अध्याय का एक अमिट-अनिवार्य पन्ना है शाहीन बाग

बहुत मुमकिन है कि स्त्री अधिकार की मौजूदा मांगों में आप इन्हें ‘जाहिल’ कह जाएं। इनका मानना है कि औरतों को दिन ढलते घर लौट आना चाहिए, अल्लाह ताला ने औरतों को एक नाजुक चीज दी है, उसे ढंककर ही घर से निकलना होता है। घर पर भी ध्यान देना जरूरी है, तलाक औरत और … Read more

महिला दिवस विशेषः अम्मा तुझे सलाम, नानी-दादी तुम्हें सलाम!

ए आर रहमान का गाया वंदे मातरम् का संस्करण, जो उपरोक्त लाइनों से शुरू होता है, 2020 में शाहीन बाग की महिलाओं ने देश की नजरों के सामने साकार कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस देश को हर उम्र और जाति-धर्म, खासकर उम्रदराज पर्दानशीन महिलाओं का अभिनंदन करना चाहिए जो कड़कड़ाती ठंड के बीच सरकारी … Read more

एक खतरा जिसकी नहीं कोई चर्चा: पर्वतीय शहरों के करोड़ों लोग तरस जाएंगे बूंद-बूंद पानी के लिए 

हिंदुकुश हिमालय क्षेत्र में करोड़ों लोग बसते हैं और पूरी तरह पानी के लिए इसके ऊपर स्थित ग्लेशियर से निकली नदियों और झरनों पर निर्भर हैं। पर, एक नए अध्ययन से पता चला है कि इस क्षेत्र के शहरी इलाकों में आने वाले वर्षों में पानी की किल्लत होने वाली है। अब तक हिंदुकुश हिमालय … Read more

किसके लिए शांति लाएगा अफगान शांति समझौता, जिसमें ‘शांति’ का जिक्र तक नहीं

पिछली 29 फरवरी को दोहा के कतर में अमेरिका, अफगान सरकार और तालिबान के बीच हुए समझौते में इतनी सावधानी बरती गई है कि उसे कहीं भी ‘शांति समझौता’ नहीं लिखा गया है। इसके बावजूद इसे दुनिया भर में शांति समझौता कहा जा रहा है। दूसरी तरफ पर्यवेक्षकों का मानना है कि अफगानिस्तान अब एक … Read more

मोदी सरकार की एक और योजना जुमला साबित, बंद होने के कगार पर है फसल बीमा योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक और योजना जुमला साबित हुई है। किसानों को फसल के नुकसान की भरपाई के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बंद होने के कगार पर है। केंद्र की मोदी सरकार ने इस योजना से हाथ खींचने शुरू कर दिए हैं और किसानों को राज्यों और बीमा कंपनियों के भरोसे छोड़ दिया … Read more

राम मंदिर का नक्शा फाइनल नहीं, अब जल्द ही चंदा जुटाने के नाम पर शुरु होगा हिंदू जागरण अभियान

राम जन्मभूमि स्थान पर मंदिर बनाने का काम एक तरह से शुरू हो चुका है। बड़ी-बड़ी जेसीबी मशीनें उस 67.7 एकड़ क्षेत्र में आने-जाने लगी हैं, जहां मंदिर बनाया जाना है। यह भी तय हो गया कि मंदिर निर्माण के लिए पैसे इकट्ठा करने का काम किस तरह किया जाना है। लेकिन उन एक दर्जन … Read more

कोरोना वायरसः गोमूत्र से इलाज के दावों से हालात बदतर ही होंगे, सरकार को ईमानदारी से मुकाबले को तैयार होना होगा

ऐसे में जब कोरोना वायरस- कोविड-2019 ने ड्रैगन को पानी पिला रखा है और पूरी दुनिया के 70 से अधिक देश इसकी चपेट में हैं, तब भारत ने खानापूर्ति के लिए एक हल्की सी चेतावनी भर जारी करके अपनी जिम्मेदारी निभा दी! सोचने की बात इसलिए है कि चीन ने जहां इससे निपटने में अपनी … Read more

राम पुनियानी का लेखः कहां हैं दिल्ली हिंसा की जड़ें और क्यों होता है हर दंगे से बीजेपी को फायदा?

कहते हैं कि इतिहास अपने आप को दोहराता है, पहले त्रासदी के रूप में और फिर प्रहसन की तरह। भारत के मामले में, सांप्रदायिक हिंसा न सिर्फ स्वयं को दोहराती आई है, वरन् वह अलग-अलग तरह की त्रासदियों के रूप में हमारे सामने आती रही है। सांप्रदायिक हिंसा की सभी घटनाओं में कुछ समानताएं भी … Read more

दो खिलाड़ियों वाला दूरसंचार बाजार भला किसके फायदे का?

वोडा-आइडिया लिमिटेड मौजूदा झटके से उबर पाती है या फिर वह भारतीय दूरसंचार बाजार से निकल जाने वाली अगली कंपनी बनती है, यह देखने की बात है। कंपनी के पास पैसे नहीं कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यूज (एजीआर) के 50 हजार करोड़ से अधिक के बकाये का भुगतान कर … Read more

मृणाल पाण्डे का लेखः गठजोड़ साधने के जोखिम और फायदे

महाबली ट्रंप के आने-जाने के हड़बोंग में चुनाव तनिक देर के लिए मीडिया के रेडार से ओझल हो गए। शाम के टीवी पर भी महाबली अमेरिकी राष्ट्रपति के विजिट के रंगारंग ब्योरे अधिक और पास में सुलग रहे दिल्ली के दंगाग्रस्त नागरिकों की छवियां बहुत कम थीं। लेकिन ट्रंप परिवार तो मेहमाननवाजी वसूल कर स्वदेश … Read more

विष्णु नागर का व्यंग्यः दिल्ली हिंसा के लिए मोदी-शाह या पुलिस नहीं, या तो नेहरू जिम्मेदार हैं या हम खुद!

नहीं साहब, आप बिल्कुल दुरुस्त हैं। जिम्मेदारी हमारी थी, हमारी है, हमारी रहेगी, क्योंकि जो मारे गए, जो घायल हुए, जिनके घर जलाए गए, जिनकी दुकानें लूटी गईंं, जिनके घरों के दरवाजे तोड़कर दंगाई घुसे, वे भी हमारे थे, आपके नहीं थे! थे क्या? वे हमारे थे, तो स्वाभाविक है, जिम्मेदारी भी हमारी है। आप … Read more

बदलते हवा पानी से मानवों से कहीं ज्यादा संकट में हैं जैव प्रजातियां, पहले से एक हजार गुना बढ़ गया है खतरा

संयुक्त राष्ट्र इटली के रोम शहर में 24 से 29 फरवरी तक जैव-विविधता बचाने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन होने जा रहा है, जिसमें विभिन्न देशों के प्रतिनिधि महासागरों और भूमि पर कम से कम 30 प्रतिशत क्षेत्र की जैव-विविधता संरक्षित करने पर चर्चा करेंगे। इस आयोजन का उद्देश्य जैव-विविधता के नाश को रोकना और … Read more

अफगान शांति-वार्ता से निकलती उम्मीदें और पाकिस्तान की भूमिका पर खड़े अंदेशे

सबकुछ ठीक रहा, तो इन पंक्तियों के प्रकाशित होने के कुछ समय बाद ही अफगानिस्तान में शांति -समझौते पर दस्तखत हो जाएंगे। इस समझौते के ठीक पहले की कुछ घटनाएं महत्वपूर्ण हैं जिन पर इसलिए नजर डालनी चाहिए क्योंकि आने वाले वक्त में वे अफगानिस्तान के शांति-स्थापना प्रयासों में महत्वपूर्ण साबित होंगी। इनमें एक परिघटना … Read more

ट्रंप दौराः मोदी ने गंवा दिया ट्रेड डील के लिए अमेरिका पर दबाव बनाने का बड़ा मौका

फरवरी का महीना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर गुजर गया। ट्रंप के यशोगान में न्यूज चैनलों ने चारण परंपरा को भी पीछे छोड़ दिया। इसमें अमेरिका-भारत के व्यापार संबंधी मुद्दे दब गए जिनके बिना दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्ते मजबूत होने की बात बेमानी है और कंप्रिहेंसिव ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप कोई शक्ल पा … Read more

खरी-खरीः दिल्ली हिंसा से अमित शाह ‘सुपर हिंदू हृदय सम्राट’ बनेंगे या राजनीति के दारा शिकोह साबित होंगे!

दिल्ली दंगों की आग में जलती रही और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मेहमान नवाजी में व्यस्त रहे। खैर, प्रधानमंत्री को तो घर आए मेहमान की मेजबानी करनी ही थी। परंतु केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, जिनके पास दिल्ली की कानून-व्यवस्था का जिम्मा है, आखिर क्या कर रहे थे? खबरों और अखबारों की … Read more

राम पुनियानीः ‘भारत माता की जय’ मार्का राष्ट्रवाद, जिसमें भारत के करोड़ों लोगों की जगह नहीं

समय के साथ, हमारी दुनिया में राष्ट्रीयता का अर्थ बदलता रहा है। राजनैतिक समीकरणों में बदलाव तो इसका कारण रहा ही है, लेकिन साथ ही विभिन्न राष्ट्रों ने समय-समय पर अपनी घरेलू नीतियों और पड़ोसी देशों के साथ अपने बदलते रिश्तों के संदर्भ में भी इस अवधारणा की पुनर्व्याख्या की हैं। राष्ट्रीयता की कई व्याख्याएं … Read more

मोदी सरकार की एक और मार, बुजुर्ग निर्माण मजदूरों की पेंशन रुकी, बीमारी और भूख का संकट

कल्पना कीजिए कि वृद्धावस्था में किसी की आय का एकमात्र स्रोत छिन जाए तो उसकी क्या स्थिति होगी? आज अनेक बुजुर्ग निर्माण मजदूर इसी दर्द को झेल रहे हैं। जब बाहरी दिल्ली के बवाना में स्थित जे जे कालोनी (पार्ट एक व दो) में यह लेखक गया तो एक के बाद एक कितने ही बुजुर्ग … Read more

दिल्ली हिंसाः जाफराबाद-मौजपुर में वो हुआ, जिसकी ताक में बैठी थीं फिरकापरस्त ताकतें

पिछले ढाई महीने से नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में हर उम्र की महिलाएं विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। इन महिलाओं ने अपने घर के आराम को कुर्बान कर दिया, सख्त सर्दी और बारिश को बरदाश्त किया, पांच सौ रुपए और बिरयानी जैसे बेहूदा आरोप झेले, गोलियां चलाने वालों … Read more

जो काम बीजेपी शाहीन बाग में नहीं कर सकी, मौजपुर ने उसे दे दिया वह मौका

रविवार यानी 23 फरवरी को दिल्ली के मौजपुर इलाके से यह खबरें आने लगीं कि नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में चल रहे प्रदर्शन में कुछ हंगामा हुआ है। जो रिपोर्ट्स आईं उनमें कहा गया कि जाफराबाद इलाके में प्रदर्शन करने वाले कुछ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इसकी प्रतिक्रिया में बीजेपी … Read more

बात-अंदाज में केजरीवाल बिल्कुल मोदी निकले: पार्टनर तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है

दिल्ली के रामलीला मैदान में अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री-पद की तीसरी पारी की शुरुआत भारत माता की जय, इंकलाब जिंदाबाद और वंदे मातरम से की। अरविंद केजरीवाल के माथे पर पहली बार अक्षत-कुंकुम वाला लाल टीका था। यह बजरंग बली के आशीर्वाद से मिली विजय का खामोश उद्घोष था। शपथ लेते वक्त केजरीवाल के सिर … Read more

आकार पटेल का लेख: भारत में न तो ट्रम्प की रुचि है और न ही कोई ज्ञान, सिवाए मनोरंजन के और कुछ नहीं है यह दौरा 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प कल भारत पहुंचेंगे। वे अहमदाबाद, आगरा और दिल्ली में कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और कुल दो दिन भारत में रहेंग। वैसे वह भारत आने को कोई खास उत्सुक नहीं थे, और अमेरिकियों के लिए यह कोई खास बात भी नहीं है। मैं जब 16 साल का था तो मैंने अमेरिका के … Read more

मृणाल पाण्डे का लेखः विद्या ददाति विनयम्, भागवत जी !

अहमदाबाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं की बैठक में संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने अचानक यह कह कर सबको चौंका दिया कि देश में तलाक लगातार बढ़ रहे हैं, जिसकी बड़ी वजह परिवारों में बढ़ती आमदनी और शिक्षा दर है। विद्या और धन पाने से मन में अहंकार का उदय होता है, जिसकी … Read more

ईवीएम और चुनाव की पारदर्शिता पर उठते सवाल

देश में संविधान की प्रस्तावना (प्रिएंबल) को इससे पहले इतने व्यापक स्तर पर और इतनी बार नहीं पढ़ा गया। बीते डेढ़ माह में हमने देखा है कि संविधान के शुरुआती पृष्ठ का देश भर में बड़े पैमाने पर पाठ किया गया। हर चुनाव से पहले आम नागरिक जिन चिंताओं से गुजरता है उन पर बात … Read more

वोटर को मुफ्तखोर न कहे बीजेपी, लोकतंत्र कमजोर होता है और तानाशाही को बल मिलता है

दिल्ली चुनाव परिणाम को बीजेपी नेता और उनके कट्टर समर्थक ऐसे दिखा-बता रहे हैं, मानो राजधानी के लोग मुफ्तखोर हैं और इसी वजह से बीजेपी को हार मिली है। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने तो साफ-साफ कहा कि दिल्ली चुनाव में मुद्दे हार गए और मुफ्तखोरी जीत गई। ऐसी ही बात गोवा के … Read more

तेजी से अमेरिकी खेमे में जाता भारत और खत्म होती ‘स्वतंत्र विदेश नीति’ की पहचान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा का काफी हद तक केवल चाक्षुष (ऑप्टिकल) महत्व है। चुनाव के साल में ट्रंप अपने देशवासियों को दिखाना चाहते हैं कि वह अमेरिका के बाहर कितने लोकप्रिय हैं। उनके स्वागत की जैसी व्यवस्था अहमदाबाद में की गई, वह भी यही बताती है। इस स्वागत-प्रदर्शन से हटकर भी भारत … Read more

खरी-खरीः अन्ना आंदोलन से जन्मे केजरीवाल अब खुलकर चलाएंगे संघ का एजेंडा

लीजिए, अरविंद केजरीवाल भी चले हिंदुत्व की राह! अपने शपथ ग्रहण समारोह में केजरीवाल ने केवल मोदी को आमंत्रित ही नहीं किया, अपितु अपने भाषण में उन्होंने खुलकर यह ऐलान भी किया कि वह केंद्र सरकार के साथ मिलकर दिल्ली के विकास के लिए काम करेंगे। इतना ही नहीं सीएए और एनपीआर/एनआरसी पर चुप्पी साधकर … Read more

एक ही है मोदी और ट्रंप की बुनियाद, इसलिए नहीं रखनी चाहिए दौरे से कोई उम्मीद

अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब घरेलू मोर्चे पर दोनों ही नेताओं- डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी, को मुश्किल हालात का सामना करना पड़ रहा है। वैसे, ट्रंप महाभियोग की आंच से सकुशल निकल चुके हैं और अमेरिकी इतिहास में वह केवल तीसरे ऐसे राष्ट्रपति बन चुके हैं जिनके खिलाफ … Read more

राम पुनियानी का लेखः घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन के 30 साल और जारी सांप्रदायिक राजनीति

जनवरी 2020 में कश्मीरी पंडितों के घाटी से पलायन को पूरे तीस साल पूरे हो गए। पंडितों की सांस्कृतिक और सामाजिक जड़ें कश्मीर घाटी में थीं। वहां से पलायन के पूर्व उन्हें घोर अन्याय, हिंसा और अपमान का सामना करना पड़ा था। इस पलायन का मूल कारण था साल 1990 के दशक में कश्मीर घाटी … Read more