मोदी सरकार की एक और मार, बुजुर्ग निर्माण मजदूरों की पेंशन रुकी, बीमारी और भूख का संकट

कल्पना कीजिए कि वृद्धावस्था में किसी की आय का एकमात्र स्रोत छिन जाए तो उसकी क्या स्थिति होगी? आज अनेक बुजुर्ग निर्माण मजदूर इसी दर्द को झेल रहे हैं।

जब बाहरी दिल्ली के बवाना में स्थित जे जे कालोनी (पार्ट एक व दो) में यह लेखक गया तो एक के बाद एक कितने ही बुजुर्ग मजदूरों ने अपने आंसुओं को रोकते हुए कांपते हाथें से अपनी बैंक की पास बुक दिखाते हुए ये दर्द-भरी कहानी बताई कि अनेक महीनों से निर्माण मजदूरों को दी जाने वाली पेंशन उन्हें नहीं मिली है।

वहीं मिले तेजपाल ने बताया कि लगभग दो साल से 3000 से 3900 रुपए तक की पेंशन मिल रही थी, पर 5 महीने पहले यह अचानक रुक गई। इस कारण खान-पान भी ठीक से नहीं हो पा रहा है और उस पर से हजारों रुपए का कर्ज भी चढ़ गया है। एक और मजदूर भगवान दास ने बताया कि वह तो बहुत बीमार भी रहे हैं। पेंशन रुक जाने से न उचित पोषण मिल पाया, न दवाई। कर्ज का बोझ भी हो गया है। उन्होंने कहा कि कुछ समझ नहीं आता कि गुजारा कैसे होगा।

कुछ ऐसी ही दर्दनाक कहानियां वहां अनेक पुरुष और महिला मजदूरों ने बताई। इस एक बस्ती में ही ऐसे मजदूरों की संख्या 100 से अधिक है, जिन्हें 5 महीने से निर्माण मजदूरों वाली विशेष पेंशन नहीं मिली है। इसके अतिरिक्त यहां 22 मजदूर ऐसे भी हैं, जिन्हें लगभग 15 महीने से यह पेंशन नहीं मिली है।

साल 1996 में निर्माण मजदूरों की सहायता और सामाजिक सुरक्षा के लिए दो कानून बने थे। इनमें उपकर या सेस लगाकर निर्माण मजदूरों की भलाई के लिए धन एकत्र करने की व्यवस्था है। इन्हीं कानूनों के अंतर्गत दिल्ली सहित सभी राज्यों में निर्माण मजदूरों की सहायता के लिए बोर्ड बने हैं, जिनके द्वारा पेंशन दी जाती है, निर्माण मजदूर परिवारों को छात्रवृति दी जाती है और विवाह या मृत्यु जैसे मौकों पर परिवार को सहयोग-राशि दी जाती है।

पिछले कुछ महीनों से निर्माण मजदूर परिवारों की पेंशन ही नहीं रुकी है अपितु छात्रवृत्ति और अन्य सहायता भी रुकी पड़ी हैं। निर्माण मजदूर पंचायत संगम और निर्माण मजदूरों की स्थाई राष्ट्रीय समिति ने मांग की है कि इन सभी निर्माण मजदूरों की पेंशन फिर से शीघ्र आरंभ की जाए और जिन महीनों की राशि बकाया है, वह भी दी जाए। तभी वह अपने पर बोझ बनते कर्ज भी वापस कर सकेंगे। इसी तरह जो छात्रवृत्ति और अन्य सहायता रुकी हुई है, वह भी शीघ्र आरंभ होनी चाहिए।

व्यापक समस्या यह है कि नए श्रम कानून कोड तैयार करने के सिलसिले में निर्माण मजदूरों के लिए पहले से बने अच्छे कानून खतरे में पड़ गए हैं। अतः इन मजदूर संगठनों और अन्य मजदूर संगठनों ने मांग की है कि हर स्थिति में पहले से चल रहे अच्छे कानूनों के अन्तर्गत स्थापित की गई निर्माण मजदूरों की भलाई की व्यवस्था बनी रहनी चाहिए। कानूनों को भली-भांति लागू करने के निर्देश जो साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे, उनका पालन होना चाहिए। निर्माण मजदूरों की बड़ी संख्या को देखते हुए उनकी भलाई के लिए बहुत संघर्ष के बाद बने कानूनों की रक्षा बहुत जरूरी है और इसे उच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

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