न्याय में देरी के मामले में भी योगी का यूपी टॉप पर, बलात्कार के 66,994 मामले अदालतों में लंबित

योगी अदित्यानाथ के रामराज्य यानि उत्तरप्रदेश में सुशासन की पोल हर रोज खुल जाती है। कभी मरीजों को अस्पताल नहीं मिल पाता है तो कभी बच्चों को नून रोटी खिलाया जाता है। देश का कोई भी क्राइम का डाटा खोल लिजिए और आंख बंद कर के कहिए कि अपना यूपी टॉप करेगा। विश्वास मानिए योगी जी आपको कभी निराश नहीं करेंगे।

ताजा मामले में केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद में कहा कि दिसंबर 2019 तक देश भर में बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम से संबंधित 2.4 लाख से अधिक मामलें लंबित हैं। जिसमें उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है।

लोकसभा में जदयू के सांसद राजीव रंजन के प्रश्न के उत्तर में कानून मंत्री ने हाइकोर्ट का हवाला देते हुई कहा- उत्तर प्रदेश में बलात्कार के 66,994 मामले अदालतों में लंबित है। इसके बाद महाराष्ट्र में 21,691 और पश्चिम बंगाल में 20,511 मामले हैं।

“उच्च न्यायालयों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम से संबंधित 2,44,001 मामले 31 दिसम्बर 2019 तक है।” देश भर में 1,023 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों की स्थापना के लिए एक योजना को अंतिम रूप दिया गया था। केंद्र-प्रायोजित योजना के तहत समयबद्ध तरीके से अपराध (POCSO) अधिनियम, 2012 से 2019-20 के दौरान राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 99.43 करोड़ रुपये जारी किया गया है, जिससे अब तक 649 संख्या की एफटीसीएस की स्थापना करने की सहमति है।

मंत्रालय ने कहा, “उच्च न्यायालयों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 31 जनवरी 2020 तक 195 एफटीसीएस पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं। जहां यूपी सरकार बड़े-बड़े दाबे कर रही है कि उन्होंने रेप पीड़ितो के लिए बहुत कुछ किया है। लेकिन आश्चर्य कि बात यह है कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, और पश्चिम

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