
नागरिकता कानून के खिलाफ पूरे देश में हो रहे विरोध प्रदर्शन को देखते हुए अमेरिका ने भारत को आगाह किया है। अमेरिका का कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता और कानून के तहत समान उपचार हमारे लोकतंत्रिक देशों के मूल सिद्धांत हैं।
नवोदय टाइम्स पर छपी खबर के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत से भारत के संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए अपने धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया है।
नागरिकता कानून के खिलाफ पूर्वोत्तर में हो रहे विरोध प्रदर्शन की आग अब पूरे भारत में फैलने लगी है। यहां तक कि देश की राजधानी दिल्ली भी इससे अछूती नहीं है। दिल्ली में भी इस कानून के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन होने लगे हैं।
बता दें कि जामिया विश्वविद्यालय (Jamia) के छात्र रविवार को प्रदर्शन के बाद जंतर मंतर जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन फ्रेंड्स कॉलोनी इलाके में दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस बात पर प्रदर्शनकारी छात्र उग्र हो गए और नोएडा से आ रही एक डीटीसी बस में आग लगा दी।
इलाके में धारा 144 लागू पुलिस ने छात्रों पर भांजी लाठियां
उसके बाद छात्रों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प शुरू हो गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया।
उसके बाद पुलिस ने छात्रों पर जमकर लाठी चलाई व आंसू गैस फेंके। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने देखते ही देखते डीटीसी व कलस्टर की तीन बसों में आग लगा दी।
इसके साथ कई गाड़ियों में तोडफ़ोड़ की। यही नहीं, कई बाइकों में भी आग लगाई। तब पुलिस ने इलाके में धारा 144 लागू कर छात्रों पर काबू पाने के लिए जमकर लाठी चलाए और आंसू गैस फेंके।
जामिया के बाद मंगलवार को दिल्ली के सीलमपुर इलाके में नागरिकता कानून के विरोध में प्रर्दशन किया गया। जिसमें उग्र भीड़ ने एक पुलिस चौकी में आग लगा दी और तीन बसों को क्षतिग्रस्त कर दिया।
प्रर्दशनकारियों ने पुलिस पर भी जमकर पत्थरबाजी की। इसमें कई पुलिस वाले घायल हुए साथ ही सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है।
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