दिल्ली हिंसा मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेताओं के बयान पर कई सवाल खड़े किए। कोर्ट ने पूछा कि क्या नफरत वाले भाषण मामले में एफआईर दर्ज करने का अब सही समय है? नफरत वाले भाषण मामले सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 6 मार्च को हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई करें और जल्द से जल्द इस मामले का निपटारा करें।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले बीजेपी नेता कपिल मिश्रा, परवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर के खिलाफ याचिका दायर करने वाले पूर्व आईएएस अफसर हर्ष मंदर को उनके बयान के लिए कड़ी फटकार लगाई। मंदर ने पहले कहा था कि सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा नहीं है, फिर भी हम वहां जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम हर्ष मंदर को नहीं सुनेंगे। और आगे कहा कि सिर्फ दंगा पीड़ितों की ओर से पेश कॉलिन गोंजाल्विस को ही सुनेंगे।
सुनवाई के दौरान कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा, “नेताओं के भड़काऊ बयानों से ही लोग आक्रोशित हुए और फिर हिंसा भड़की। बीजेपी सांसद परवेश वर्मा के ‘गोली मारो’ बयान ने लोगों को उकसाने का काम किया।” उन्होंने आगे कहा कि हर रोज 10 लोग मर रहे हैं। इस बयान पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आपत्ति जाहिर करते हुए कहा कि गोंजाल्विस गैर-जिम्मेदाराना बातें कर रहे हैं। 10 लोगों के रोज मरने की बात बिल्कुल गलत है।
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने दिल्ली चुनाव के लिए रिठाला क्षेत्र में रैली को संबोधित करने के दौरान भड़काऊ भाषण दिया था। उन्होंने रैली के दौरान मंच से खड़े होकर नारे लगवाए थे, "देश के गद्दारों को, गोली मारो.. को।” वहीं, दिल्ली से बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने एक बैठक के दौरान खुले तौर पर ऐलान किया था कि राजधानी में 500 सरकारी संपत्तियों पर मस्जिदों और कब्रिस्तानों का निर्माण किया गया है।