जैसलमेर की घटना को गलत तरीके से जातिवादी हिंसा बताकर सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा

सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से दो तस्वीरें इस दावे के साथ साझा की जा रही हैं कि राजस्थान के जैसलमेर में ऊँची जाति के कुछ लोगों ने दलित समाज के एक आदमी सुरेश सैन के दोनों हाथ काट दिए। ट्विटर पर ‘बीएसपी पंजाब‘ ने इन तस्वीरों को निम्नलिखित टिपण्णी के साथ साझा किया,“राजस्थान के जैसलमेर में दलित समाज के ऑटो मकैनिक सुरेश ने बदमाशों से अपने आप को बचाने के लिए अपने हाथ आगे कर दिए और मनुवादी गुंडों ने अपनी तलवार से उसके दोनों हाथ ही अलग कर दिए। साथियों ऐसी दरिंदगी कब तक होती रहेगी”

फेसबुक पेज ‘भीम आर्मी राजस्थान’ द्वारा भी कुछ इसी तरह के दावों के साथ ये दो तस्वीरें साझा की गयी हैं। यह रिपोर्ट लिखने के समय तक इस फेसबुक पोस्ट पर 700 से ज्यादा लोग प्रतिक्रिया व्यक्त कर चुके हैं एवं 1100 से ज़्यादा लोग इसे साझा कर चुके हैं।

तथ्य-जाँच

ऑल्ट न्यूज़ ने जब प्रारंभिक जाँच के लिए गूगल पर ‘जैसलमेर हाथ सैन’ जैसे प्रमुख शब्दों को ढूँढा तो स्थानीय अखबारों द्वारा किए गए कुछ लेख सामने आए।पत्रिका द्वारा प्रकाशित लेख के अनुसार ये घटना सोमवार 15 जुलाई, 2019 को राजस्थान के जैसलमेर जिले के इंदिरा नगर मोहल्ले में हुई थी। इस लेख के अनुसार पीड़ित सुरेश सैन ने जवाहर अस्पताल जैसलमेर से जोधपुर जाते हुए पत्रकारों को ये बताया कि इस घटना से चार पाँच दिन पहले उसका आरोपियों से किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था। उसके बाद बडोड़ा गाँव निवासी श्याम सिंह, राजू सिंह, पूनम सिंह, और अखेराज सिंह बोलेरो गाड़ी में सवार होकर आए और पीड़ित पर तलवार से हमला कर दिया। हमले में सुरेश सैन का एक हाथ तो लगभग पूरा कट गया जबकि दूसरा हाथ भी गंभीर रूप से जख्मी हुआ है।

इसके बाद ऑल्ट-न्यूज़ ने जैसलमेर थाना प्रभारी किशन सिंह से संपर्क किया, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि पीड़ित सुरेश सैन दलित नहीं हैं, बल्कि OBC(अन्य पिछड़ी जाति) वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। किशन सिंह ने बताया, “मौके पर मौजूद चश्मदीद गवाह ने जो प्राथमिकी दर्ज कराई है, उसमें श्याम सिंह, राजू सिंह एवं पूनम सिंह का नाम लिया है, जिनमें से श्याम सिंह और राजू सिंह को हिरासत में लिया जा चुका है।”

जब ऑल्ट न्यूज़ ने जैसलमेर की पुलिस अधीक्षक डॉक्टर किरन कैंग से इस वारदात के बारे में प्रश्न किया, तो उन्होंने जवाब में कहा, “यह नहीं कहा जा सकता कि ये घटना केवल जाति के आधार पर ही हुई है। पीड़ित सुरेश सैन और अभियुक्त पक्ष दोनों ही DTO (जिला यातायात कार्यालय) में एजेंट हैं और कुछ दिन पहले ही एक गाड़ी की RC के सन्दर्भ में आपस में मुठभेड़ कर चुके हैं। अभियुक्तों ने पिछली लड़ाई का बदला लेने के लिए इस घटना को अंजाम दिया है।” उन्होंने यह भी बताया कि अभियुक्तों के खिलाफ क्षेत्र में गुंडागर्दी के कुछ और पुराने केस भी दर्ज हैं।

ऑल्ट न्यूज़ अपनी जाँच के बाद इस निष्कर्ष पर पहुँची है कि हालाँकि सुरेश सैन के साथ एक आपराधिक घटना घटित हुई है, जिसमें उसके दोनों हाथों को राजपूत समाज के कुछ उपद्रवी लोगों द्वारा बेहद गंभीर चोट पहुँचाई गयी है, लेकिन जैसा कि सोशल मीडिया पर साझा किए गए दावों में सुरेश सैन को दलित बताया गया है, वह झूठ है। सोशल मीडिया पर इस घटना को जिस तरह एक जातिवादी हिंसा के रूप में प्रस्तुत किया गया है, ऑल्ट न्यूज़ ने इस दावे को भी तथ्यहीन पाया है। ऑल्ट न्यूज़ की पड़ताल यह दर्शाती है कि इस घटना का सम्बन्ध पुरानी दुश्मनी से है।     

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