एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को इस बात पर सवाल उठाया कि जब कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मसला सुलझाया जाना है तो फिर अमेरिकी राष्ट्रपति से इस बारे में बाचतीत करने की क्या जरुरत है।
ओवैसी की यह टिप्पणी भारत की तरफ से जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देनेवाले अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद सोमवार को पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच टेलीफोन पर बात के बाद की गई है।
डोनाल्ड ट्रंप के साथ पीएम मोदी की करीब 30 मिनट तक चली लंबी बातचीत पर निराशा व्यक्त करते हुए ओवैसी ने सामाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि प्रधानमंत्री ने अमिरकी राष्ट्रपति की तरफ से ‘कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्था की बात’ के पूर्व में किए दावे को मान लिया है।
ओवैसी ने कहा- “मैं हैरान और आश्चर्य हूं कि पीएम मोदी ने ट्रंप के साथ फोन पर बात कर उस मुद्दे पर चर्चा की जो द्विपक्षीय है। पीएम मोदी यह कदम ट्रंप के पूर्व में किए गए दावे की पुष्टि करता है कि जिन्होंने कहा था कि ‘उन्हें मध्यस्थता के लिए कहा गया था।’ यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है और इसमें किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की जरुरत नहीं है।”
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