असदउद्दीन ओवैसी समाजवादी पार्टी के गढ़ सम्भल से चुनाव लडेंगे ? जनिये क्या है वजह?

नई दिल्ली: 2017 के विधानसभा चुनाव में ऑल इण्डिया मजलिस ऐ इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने उत्तर प्रदेश में अपने प्रत्याशी मैदान में उतरे थे जिनमें सबसे ज़्यादा कामयाबी सँभल विधानसभा सीट पर मिली थी जहां जियाउर्रहमान बर्क़ को 60426 वोट पाकर दूसरे नम्बर पर रहे थे।जियाउर्रहमान बर्क़ पूर्व साँसद शफ़ीक़उर्रहमान बर्क़ के पौते हैं जिनको बर्क़ साहब का राजनीतिक वारिस माना जारहा है,लोकसभा 2019 के लिये चुनाव आयोग ने अधिसूचना जारी करदी है,सम्भल में में 23 अप्रेल को चुनाव होना है ।

विशेष सूत्रों के अनुसार पता चला है कि ऑल इंडिया मजलिस ऐ इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष बैरसिटर असदउद्दीन ओवैसी सम्भल लोकसभा से चुनाव लड़ने के बारे में चर्चा पार्टी के नेताओं से चर्चा कर रहे हैं,ओवैसी को हैदराबाद के अलावा उत्तर प्रदेश की एक सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्तावAimim यूपी के अध्यक्ष शौकत अली ने रखा था।

सूत्रों से पता चला है कि सम्भल लोकसभा में वोटरों की नब्ज टटोलने के लिए ओवैसी की पार्टी की तरफ से सर्वे भी शुरू होचुका है,और हैदराबाद की एक टीम सम्भल लोकसभा क्षेत्र में सर्वे कर रही है जिसकी रिपोर्ट मिलने के बाद ओवैसी फैसला लेंगे।ओवैसी के चुनाव लड़ने की सुगबुगाहट से गठबन्धन के राजनीतिक गलियारों में खलबली मची हुई है,मुस्लिम बाहुल्य माने जाने वाली संभल पर 2019 लोकसभा चुनाव में सभी की नजर होगी. मुस्लिम बहुल इलाका होने के बावजूद 2014 के चुनाव में इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी, जिसे समाजवादी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना गया. यहां से बीजेपी के सत्यपाल सैनी चुनाव जीतकर आए. इस सीट से समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव और दिग्गज नेता प्रोफेसर रामगोपाल यादव भी सांसद चुने जा चुके हैं।

संभल लोकसभा सीट का इतिहास

सामान्य सीट संभल 1977 में अस्तित्व में आई, इमरजेंसी के बाद देश में पहली बार चुनाव हो रहे थे यहां से चरण सिंह की पार्टी ने जीत दर्ज की. उसके बाद 1980, 1984 में लगातार कांग्रेस फिर 1989, 1991 में जनता दल ने ये सीट जीती. 1996 में बाहुबली डीपी यादव ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर इस सीट पर कब्जा किया।

1998 में ये सीट वीआईपी सीटों की गिनती में आ गई, तत्कालीन समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने 1998, 1999 में यहां से चुनाव जीता. 2004 में उनके भाई प्रोफेसर रामगोपाल यादव यहां से सांसद चुने गए. लेकिन 2009 में ये सीट बहुजन समाज पार्टी के खाते में गई।

संभल लोकसभा सीट का समीकरण

रामपुर, अमरोहा और मुरादाबाद जैसी सीटों से सटी हुई संभल लोकसभा में भी मुस्लिम वोटरों का वर्चस्व है. यही कारण रहा कि भारतीय जनता पार्टी के लिए ये सीट मुश्किल मानी जाती थी. लेकिन 2014 में बीजेपी ने यहां फतह हासिल की.संभल में कुल 16 लाख से अधिक वोटर हैं, इनमें करीब नौ लाख पुरुष और 7 लाख महिला हैं. 2014 में यहां 62.4 फीसदी मतदान हुआ था, इनमें से 7658 वोट NOTA को गए थे. यहां करीब 40 फीसदी हिंदू आबादी और 50 फीसदी से अधिक मुस्लिम आबादी है.संभल लोकसभा के अंतर्गत कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें कुन्दरकी, बिलारी, चंदौसी, असमोली और संभल शामिल हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में सिर्फ चंदौसी विधानसभा ही भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थी, जबकि अन्य सभी सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा

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