
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और अन्य हिंदू संगठनों ने शनिवार को हिंदू संस्कृति और परंपराओं का संस्थागत विकास करने और शिक्षण तंत्र में हिंदू साहित्य को शामिल करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 28, 29 और 30 में संशोधन की मांग की।
खास खबर पर छपी खबर के अनुसार, हिंदू चार्टर टीम के बैनर तले साथ आए संगठनों ने एक राष्ट्रीय सम्मेलन में ये मांगें रखीं। इन मांगों में हिंदुओं को समान अधिकार और बहुसंख्यक समुदाय के मंदिरों और धार्मिक संस्थानों के रखरखाव में राज्य द्वारा दखल नहीं देने पर जोर दिया गया।
दिनभर चले सम्मेलन का उद्घाटन विहिप के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने किया। इसमें सहभागियों ने देश के मौजूदा शिक्षातंत्र में विदेशी साहित्य की अधिकता और हिंदू साहित्य के विशाल संग्रह से पाठ्यक्रमों को दूर रखने के प्रयासों का उल्लेख किया। अनुच्छेद 30 धार्मिक अल्पसंख्यकों को शिक्षण संस्थान की स्थापना और उसका प्रशासन करने का अधिकार प्रदान करता है।
यह अनुच्छेद सभी धार्मिक व भाषायी अल्पसंख्यकों को अपने शिक्षण संस्थान को स्थापित करने और उसे संचालित करने का आधिकार देता है।
चेन्नई के एक संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. वेणु गोपालन ने कहा कि अनुच्छेद 28 बहुसंख्यक समुदाय को उसकी पुरानी सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं को भविष्य की पीढ़ी तक पहुंचाने से रोकता है।
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