
केंद्र सरकार ने स्पष्टीकारण देते हुए कहा है कि 1987 से पहले भारत में पैदा हुआ कोई भी व्यक्ति या जिसके माता-पिता 1987 से पहले पैदा हुए हों, कानून के अनुसार एक भारतीय नागरिक होंगे।
नागरिक संशोधन कानून या या संभावित देशव्यापी एनआरसी के कारण चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
जागरण डॉट कॉम पर छपी खबर के अनुसार सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वालों से कहा है कि यदि विरोध करने वाले लोगों के पास कोई सुझाव हो तो उसे स्वीकार करने के लिए तैयार है।
उधर, गृह मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि राज्य सरकारों के पास नागरिकता संशोधन कानून के कार्यान्वयन को अस्वीकार करने की कोई शक्तियां नहीं हैं क्योंकि कानून को संविधान की सातवीं अनुसूची की केंद्रीय सूची के तहत अधिनियमित किया गया है और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर जो अगले साल किया जाना है।
CAA नागरिकता संशोधन कानून 2019, देश के बाहर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों के लिए भारतीय नागरिकता देने का रास्ता खोलता है। इन तीनों पड़ोसी देशों से उत्पीड़ित या किसी और कारण से अपना देश छोड़कर भारत में आना चाहते हैं।
CAA में छह गैर-मुस्लिम समुदायों – हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी से संबंधित अल्पसंख्यक शामिल हैं। इन्हें भारतीय नागरिकता तब मिलेगी, जब वे 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर गए हों।
पिछली नागरिकता के मानदंड क्या थे? इस संशोधन विधेयक के आने से पहले तक भारतीय नागरिकता के पात्र होने के लिए भारत में 11 साल तक रहना अनिवार्य था। नए बिल में इस सीमा को घटाकर छह साल किया गया है।
एनआरसी (NRC) नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर है, जो भारत से अवैध घुसपैठियों को निकालने की एक प्रक्रिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनआरसी प्रक्रिया हाल में असम में पूरी हुई।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधान संसद में घोषणा की थी कि NRC पूरे भारत में लागू किया जाएगा।
असम में लागू की गई एनआरसी (NRC) के तहत एक व्यक्ति भारत का नागरिक होने के योग्य है यदि वे साबित करते हैं कि या तो वे या उनके पूर्वज 24 मार्च 1971 को या उससे पहले भारत में थे।
असम में NRC प्रक्रिया को अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को बाहर करने के लिए शुरू किया गया था, जो भारत आए थे। बता दें कि 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद बांग्लादेश का निर्माण हुआ था।
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