‘श्रीराम और अल्लाह दोनों का सम्मान होना चाहिए’

‘श्रीराम और अल्लाह दोनों का सम्मान होना चाहिए’

अयोध्या मामले में आज सुनवाई का 29 वां दिन था. आज पूरे दिन मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने दलीलें रखीं.धवन ने कहा कि हिंदू पक्ष चाहता है कि राम जन्मभूमि पर मौजूद सभी मौजूदा निर्माण को ध्वस्त कर नए मंदिर का निर्माण किया जाए. वो दावा तो कर रहे है कि श्री राम ने अयोध्या में जन्म लिया था लेकिन किस खास जगह पर जन्म लिया, उसका उल्लेख उनकी याचिका में कही नहीं है. हिन्दू पक्ष ओर से दायर मुकदमे का मकसद है कि वहां सब कुछ खत्म कर सिर्फ राम मंदिर रहे.

‘श्री रामजन्म स्थान को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा नहीं’
धवन ने कहा कि मैं ये मान लेता हूं कि श्री राम ने वहां जन्म लिया लेकिन क्या इतना भर होने से श्रीराम जन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा (जीवित व्यक्ति मानकर उनकी ओर से मुकदमा दायर) दिया जा सकता है. 1989 से पहले किसी ने श्री रामजन्म स्थान को न्यायिक व्यक्ति नहीं माना. राजीव धवन ने अपनी दलीलों के जरिये श्री रामजन्म स्थान को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा देने पर सवाल उठाते हुए कई उदाहरण दिये. कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहब जी को जब तक गुरुद्वारा में प्रतिष्ठित नहीं किया जाता, तब तक उन्हें भी ‘न्यायिक व्यक्ति’ नहीं माना जा सकता. इसी तरह हर मूर्ति को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा नहीं दिया जा सकता.

‘श्रीराम और अल्लाह दोनों का सम्मान होना चाहिए’
राजीव धवन ने कहा कि श्री राम का सम्मान होना चाहिए, इसमे कोई संदेह नहीं है.लेकिन भारत जैसे महान देश में अल्लाह का भी सम्मान है. अगर दोनों का सम्मान कायम नहीं रहता है, तो विविधिता को समेटे ये देश खत्म हो जाएगा. धवन ने कहा कि ये साफ है कि राम चबूतरे पर प्रार्थना होती थी, लेकिन पूरे इलाके में कभी पूजा नहीं की गई. राजीव धवन ने हिंदू पक्ष के द्वारा परिक्रमा के संबंध में गवाहों द्वारा दी गई गवाहियों का हवाला दिया. धवन ने कहा कि परिक्रमा के बारे में सभी गवाहों ने अलग अलग बात कही है. उनकी गवाही में विरोधाभास है.


सुनवाई के दौरान जस्टिस डी वाई चन्द्रचूड़ ने अहम टिप्पणी की. जस्टिस चन्द्रचूड़ ने सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की ओर से पेश राजीव धवन से कहा – ‘उनके लिए अयोध्या को लेकर हिंदुओं की आस्था पर सवाल मुश्किल होगा. यहाँ तक कि एक मुस्लिम गवाह ने कहा है कि अयोध्या का हिंदुओं के लिए वही स्थान है, जो मुसलमानों के लिए मक्का.’

‘हमारा केस समयसीमा का उल्लंघन नहीं करता’
मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि हमने 18 दिसंबर 1961 को केस दायर किया. हिंदू पक्ष के मुताबिक लिमिटेशन के लिहाज से हम दो दिन देरी से थे. लेकिन हमारे केस में लिमिटेशन की समयसीमा 16 दिसंबर से भला क्यों शुरू होगी. ये समय सीमा तो 22-23 दिसंबर से शुरू होनी चाहिए, क्योंकि उसी रात वहां मूर्तियां रखी गई थी. मुझे ये साबित करने की ज़रूरत नहीं कि 17, 18, 19 दिसंबर तक हमारा वहां कब्ज़ा रहा क्योंकि 22 दिसंबर से पहले वहां पर कोई गतिविधि नहीं थी .राजीव धवन ने कहा कि क्या बादशाह (बाबर) ने कुरान/ धर्म का उल्लंघन किया. इसको संविधान की कसौटी पर ही परखा जाएगा

‘क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्तां बनता गया’
राजीव धवन ने जिरह ख़त्म करते हुए कहा- भारत विविधता का देश रहा है, लेकिन कुछ लोग इसे एक रंग में रंग देना चाहते है. धवन ने आज की अपनी जिरह का अंत फ़िराक़ गोरखपुरी के इस शेर से किया-
“सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के ‘फ़िराक़’ क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया”
कल भी राजीव धवन बहस जारी रखेंगे. इस हफ्ते अयोध्या मामले में मंगल, बुध, और गुरुवार को साढ़े दस बजे से 5 बजे तक सुनवाई होगी. शुक्रवार को दोपहर 1 बजे तक सुनवाई होगी.

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