
पाकिस्तान की एक अदालत ने सोमवार को व्यवस्था दी कि मुस्लिम पुरुष को दूसरी शादी करने के लिए मध्यस्थता परिषद से इजाजत लेना जरूरी है, भले ही पहली पत्नी ने उसे अनुमति क्यों नहीं दे रखी हो।
जियो टीवी ने खबर दी है कि इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अतहर मिनल्लाह ने सोमवार को 12 पन्नों का आदेश जारी किया जिसके मुताबिक, पुरुष को दूसरी शादी करने से पहले मध्यस्थता परिषद से इजाज़त लेना अनिवार्य है।
ज़ी न्यूज़ पर छपी खबर के अनुसार, अदालत ने कहा कि कोई व्यक्ति अपनी पहली पत्नी के होते हुए दूसरा निकाह करना चाहता है तो उसे कानून में दी गई प्रक्रिया और शर्तों को पूरा करना होगा, नहीं तो उसे जेल जाना होगा या जुर्माना भरना होगा या दोनों चीज़ें भुगतनी होंगी।
मुस्लिम परिवार कानून अध्यादेश 1961 के तहत पहली पत्नी के होते हुए कोई भी व्यक्ति मध्यस्थता परिषद की लिखित मंजूरी के बिना दूसरा निकाह नहीं कर सकता है।
अदालत लियाकत अली मीर नाम के एक व्यक्ति से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी। मीर ने 2011 में प्रेम विवाह किया था और उसने 2013 में मध्यस्थता परिषद और पहली पत्नी की अनुमति के बिना दूसरा निकाह कर लिया। अदालत ने कहा कि मुस्लिम परिवार अध्यादेश 1961 के तहत बिना इजाज़त दूसरी शादी करने वाला सजा और जुर्माने का हकदार है।
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