
ऑटो सेक्टर में बढ़ती मंदी को देखते हुए मारुति की तर्ज पर दूसरी कंपनियां भी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा रही है। यूटिलिटी व्हीकल्स बनाने वाले कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा ने भी खुलासा किया है उसने अप्रैल से लेकर अभी तक कई सौ अस्थाई कर्मचारियों की छंटनी की है।
इससे पहले देश की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने खुलासा किया था कि मंदी के चलते उसने 3,000 अस्थाई कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया है।
अमर उजाला पर छपी खबर के अनुसार, महिंद्रा एंड महिंद्रा के प्रबंध निदेशक पवन गोयनका ने खुलासा किया है कि कंपनी 01 अप्रैल से लेकर अभी तक 1,500 अस्थाई कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी है।
श्रीलंका में कंपनी के पहले स्थानीय असेंबलिंग प्लांट के उद्घाटन के मौके पर गोयनका ने आगे कहा कि उनकी कोशिश रहेगी कि और लोगों को न हटाया जाए, लेकिन मंदी आगे भी जारी रही, तो और भी कर्मचारियों को हटाया जा सकता है।
इस महीने की शुरुआत में गोयनका ने यह मद्दा उठाया था और कहा था कि सप्लायर, डीलर और मूल उपकरण निर्माता लोगों की छंटनी की तैयारी कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि आगामी त्यौहारी सीजन भारतीय ऑटो इंडस्ट्री के लिए काफी अहम है, और उस दौरान भी मंदी का दौर जारी रहता है, तो नौकरियों और निवेश पर तो संकट गहराएगा ही, साथ ही कई सप्लायर खुद को दिवालिया घोषित कर देंगे।
उन्होंने उद्योग को मंदी से बचाने के लिए सरकार से समर्थन मांगते हुए कहा कि सरकार अगर छह से आठ महीने तक इंडस्ट्री की मदद कर दे, तो कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इस जुलाई में यात्री वाहनों की बिक्री में 19 साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई है, जब बिक्री घटकर 18.71 फीसदी तक पहुंच गई है।
ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी एक्मा ने अंदेशा जताया है कि अगर मांग में सुधार नहीं आया, तो 10 लाख नौकरियां जा सकती है। वहीं फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि पिछले तीन महीने में दो लाख लागों की छंटनी हो चुकी है।
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