
लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर चर्चा के दौरान कांग्रेस के सीनियर लीडर मनीष तिवारी ने गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर हमला बोला है जिसमें उन्होंने धर्म के आधार पर देश के विभाजन के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया था.
मनीष तिवारी नेकहा कि तथ्य यह है कि पहली बार अहमदाबाद में 1935 में वीर सावरकर ने द्विराष्ट्र का सिद्धांत दिया था. हिंदू महासभा के अधिवेशन में उन्होंने यह बात कही थी. उनके इस आरोप पर बीजेपी सांसदों ने ऐतराज भी जताया.
नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर सरकार पर वार करते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि हम नागरिकों में कोई भेदभाव नहीं करते हैं तो फिर नागरिकता देने में भी ऐसा नहीं किया जाना चाहिए. इससे पहले दिन में गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल को लेकर कांग्रेस को घेरा था.
विधेयक के समर्थन में उन्होंने कहा था कि इस विधेयक की इसलिए ज़रूरत पड़ी, क्योंकि कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का विभाजन किया. शाम को इसके जवाब में कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा है कि यह बिल असंवैधानिक और समानता के मूल अधिकार के ख़िलाफ़ है.
उन्होंने कहा कि अगर इस देश में दो राष्ट्र की थ्योरी किसी ने दी थी तो वो कांग्रेस ने नहीं बल्कि 1935 में अहमदाबाद में हिंदू महासभा के अधिवेशन में विनायक दामोदर सावरकर ने दी थी.
दिन में अमित शाह ने विधेयक पेश करने की अनुमति मांगी, तो लोकसभा में हंगामा हो गया. अधीर रंजन चौधरी समेत कई विपक्षी नेताओं ने इस मामले पर केंद्र सरकार को घेरा.
लेकिन अमित शाह ने विधेयक के पक्ष में कई तर्क रखे. बाद में मतदान हुआ और 293 सदस्यों ने विधेयक पेश करने के पक्ष में मतदान किया. 82 सदस्यों ने इसके ख़िलाफ़ वोटिंग की. इसके बाद लोकसभा में विधेयक पेश कर दिया गया.
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