
रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना की है. रघुराम राजन ने कहा है कि भारत को राष्ट्रीय और धार्मिक नायकों की बड़ी-बड़ी प्रतिमाएं बनाने के बजाए ज्यादा से ज्यादा आधुनिक स्कूल और विश्वविद्यालय बनवाने चाहिए.
इंडिया टुडे पत्रिका के लिए लिखे लेख, ‘How to fix the economy’ में उन्होंने कहा है कि हिन्दू राष्ट्रवाद न सिर्फ सामाजिक तनाव को बढ़ाता है, बल्कि ये भारत को आर्थिक विकास के रास्ते से भी डिगा देता है.
मूर्तियां नहीं स्कूल-विश्वविद्यालय बनाए भारत
नरेंद्र मोदी सरकार की सामाजिक-राजनीतिक एजेंडे पर टिप्पणी करते हुए पूर्व आरबीआई गवर्नर ने कहा, “राष्ट्रीय या धार्मिक नायकों को विशाल प्रतिमाएं बनाने के बजाय भारत को ज्यादा से ज्यादा स्कूल और विश्वविद्यालय बनाने चाहिए, जहां पर यहां के बच्चों का मानसिक विकास होगा, वे ज्यादा सहिष्णु और एक दूसरे के प्रति सम्मान जताने वाले बनेंगे. इससे ये बच्चे भविष्य की कॉम्पीटिशन भरी दुनिया में अपनी जगह बनाने में कामयाब होंगे.”
तनाव पैदा करता है हिन्दू राष्ट्रवाद
रघुराम राजन ने लिखा है कि बहुसंख्यकवाद इस वक्त पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो रहा है और भारत भी इसका अपवाद नहीं है. उन्होंने लिखा, “सत्ता में जो होते हैं उनकी एक प्रवृति होती है कि वे ज्यादा से ज्यादा नियंत्रण चाहते हैं, मौजूदा सरकार भी अपवाद नहीं है, खासकर तब जब इस सरकार के सोशल और पॉलिटिकल एजेंडा का फोकस दिखता है…” राजन आगे लिखते हैं, “हिन्दू राष्ट्रवाद न सिर्फ सामाजिक तनाव पैदा करेगा, जो किसी भी तरह से भारत के हित में नहीं है, बल्कि ये भारत के आर्थिक विकास पर भी असर डालता है, जिससे कि सामाजिक तनाव और भी बढ़ता है.”
रघुराम राजन ने सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग के लिए भी नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना की है. उन्होंने कहा है कि सरकार अपने ही अधिकारियों को कमजोर कर रही है, क्योंकि उन्हें भविष्य की सरकारों द्वारा भी ऐसी ही कार्रवाई का डर सताएगा. राजन ने लिखा है कि प्रोफेशनलिज्म का मतलब ये है कि जांच करने वाली और टैक्स एजेंसियों को किसी के पीछे पड़ने की इजाजत नहीं देनी चाहिए. इसके अलावा जांच एजेंसियों को ये सावधानी बरतनी चाहिए कि वे सभी बिजनेस को ही कहीं झूठ और अपराधिक न घोषित कर दें. उन्होंने कहा कि ये संदेश नहीं जाना चाहिए कि इनका राजनीतिक बदले की भावना से इस्तेमाल किया जा रहा है.
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