
विश्व हिंदू परिषद ने बुधवार को अयोध्या भूमि विवाद में सभी दलीलों को पूरा करने की समय-सीमा निर्धारित करने के लिए उच्चतम न्यायालय को धन्यवाद दिया और कहा कि नवंबर के मध्य तक राम मंदिर के निर्माण में सभी बाधाओं को हटाया जा सकता है।
उच्चतम न्यायालय ने राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की सुनवाई पूरी करने के लिये बुधवार को 18 अक्टूबर तक की समयसीमा निर्धारित कर दी। शीर्ष अदालत के इस कदम से 130 साल से भी अधिक पुराने अयोध्या विवाद में नवंबर के मध्य तक फैसला आने की संभावना बढ़ गयी है।
साक्षी प्रभा पर छपी खबर के अनुसार, विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि शीर्ष अदालत का आदेश सभी पक्षों को अपनी दलीलें पेश करने का अवसर सुनिश्चित करता है और कोई भी मामले को लम्बा नहीं खींच सकता है।
उन्होंने कहा कि विहिप आदेश के लिए उच्चतम न्यायालय को धन्यवाद देती है और उम्मीद है कि नवंबर के मध्य तक अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की सभी बाधाओं को दूर किया जा सकता है।
शीर्ष अदालत ने इस मामले में शनिवार को भी सुनवाई करने का प्रस्ताव रखा और साथ ही यह भी कहा कि संबंधित पक्षकार यदि चाहें तो मध्यस्थता के माध्यम से इस विवाद का सर्वमान्य समाधान करने के लिये स्वतंत्र हैं और वे ऐसा समाधान उसके समक्ष पेश कर सकते हैं।
परंतु शीर्ष अदालत ने दोनों ही पक्षों के वकीलों से कहा कि वह चाहती है कि इस मामले की रोजाना हो रही सुनवाई 18 अक्टूबर तक पूरी की जाये ताकि न्यायाधीशों को फैसला लिखने के लिये करीब चार सप्ताह का समय मिल सके।
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