नई दिल्ली: देश की तमाम हिलाल कमेटियों की तरफ से ज़िल्हिज्जा का चाँद दिखाई देने का ऐलान किया गया है,जिसके बाद दुनिया के दूसरे बड़े त्यौहार ईद-उल-अज़हा का ऐलान किया गया है।

इमारत शरिया बिहार झारखण्ड ओडिशा के अनुसार देशभर में कई जगहों पर चाँद देखने का आयोजन किया गया था,जिसके बाद ऐलान किया है कि 12 अगस्त 2019 को ईद उल अज़हा मनाई जायेगी।

बता दें की इस दिन खुदा की इबादत में भेड़ या बकरी की कुर्बानी दी जाती है. सुबह नमाज पढ़ने के बाद कुर्बानी की रस्म की जाती है. खास बात है कि कुर्बानी के गोश्त का अधिकतर हिस्सा सिर्फ गरीब लोगों में तकसीम किया जाता है. बकरीद के त्योहार का इस्लामिक मान्यताओं में बहुत महत्व है. इसे मुसलमानों के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक माना जाता है. इस्लाम में इस दिन अल्लाह के नाम कुर्बानी देने की परंपरा है।

बता दें कि ईद-उल-जुहा (Eid Ul Zuha) हज़रत इब्राहिम की कुर्बानी की याद के तौर पर मनाया जाता है.इस दिन हज़रत इब्राहिम ने अल्लाह के हुक्म पर अल्लाह के प्रति अपनी वफादारी दिखाने के लिए अपने बेटे हज़रत इस्माइल को कुर्बान करने पर राजी हुए थे।
इस त्यौहार का मुख्य उद्देश्य लोगों में जनसेवा और अल्लाह की सेवा के भाव जगाना है. ईद-उल-जुहा (Eid Ul Zuha) का यह पर्व इस्लाम (Islam) के पांचवें सिद्धान्त हज की भी पूर्ति करता है।
ईद का चांद दिखाई देने के बाद कुर्बानी के जानवर को खरीदने बेचने का दौर शुरू हो जायेगा, मुसलमान बकरे भैंसे आदि जानवर खरीदकर उनकी ज़्यादा से ज़्यादा खिदमत करके सवाब हासिल करेंगे।