जब फ़िल्में करोड़ो में कमा रही हैं तो आर्थिक सुस्ती कैसे?- केंद्रीय मंत्री

जब फ़िल्में करोड़ो में कमा रही हैं तो आर्थिक सुस्ती कैसे?- केंद्रीय मंत्री

अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर घिरी मोदी सरकार के मन्त्री अजीबो गरीब बयान दे रहे हैं। ताज़ा बयान केंद्रीय मन्त्री रविशंकर प्रसाद ने दिया है। शनिवार को उन्होंने कहा की फिल्मों ने 120 करोड़ रुपए कमाए। इससे पता चलता है कि अर्थव्यवस्था मजबूत है। कुछ ही दिनों पहले बता दें की अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक सुस्ती का माहौल है और भारत व ब्राजील में इस साल सुस्ती का असर अधिक गंभीर दिखेगा। प्रसाद के पास कानून और न्याय, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की जिम्मेदारी है।

एजेंसी की खबरों के मुताबिक एक सवाल के जवाब में प्रसाद ने कहा कि मुझे बताया गया है कि दो अक्टूबर को राष्ट्रीय अवकाश के बावजूद तीन हिंदी फिल्मों ने 120 करोड़ रुपए कमा लिए। यदि अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं है, तो सिर्फ तीन फिल्मों ने एक ही दिन में इतनी बड़ी राशि कैसे कमा ली। प्रसाद भाजपा का चुनाव प्रचार करने के लिए मुंबई गए हुए थे। महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव है।

आईएमएफ की एमडी क्रिस्टीना जॉर्जीवा ने हाल में कहा था कि इस साल दुनिया के 90 फीसदी हिस्से में विकास दर काफी कम रहेगी। भारत और ब्राजील में सुस्ती का असर अपेक्षाकृत अधिक दिखेगा। आईएमएफ के इस बयान पर टिप्पणी मांगे जाने पर प्रसाद ने कहा कि भारत को लेकर आईएमएफ की गणना अधूरी है। और यह न भूलिए कि जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, भारत ग्यारहवें नंबर पर था। आज हम पांचवीं सबसे बड़ी (अर्थव्यवस्था) हैं। हमने फ्रांस को भी पीछे छोड़ दिया है।

अर्थव्यवस्था में गिरावट की चर्चा को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग, इन्फोर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी सेक्टर, मुद्रा लोन और वाणिज्यिक सेवा का प्रदर्शन काफी अच्छा है। संयोग है कि प्रसाद का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब विश्व प्रतिस्पर्धा सूचकांक में भारत 10 पायदान पीछे खिसक गया है। वहीं, शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में औद्योगिक उत्पादन में 1.1 फीसदी गिरावट आई। यह गत साल में उद्योग का सबसे बुरा प्रदर्शन है। विश्व प्रतिस्पर्धा सूचकांक की रिपोर्ट के बारे में प्रसाद ने कहा कि इनोवेशन, स्टार्टअप्स और बाजार के आकार जैसे पैमाने पर हमारी स्थिति सुधरी है। हां यह सच है कि कुछ अन्य पैमाने पर हम पीछे हुए हैं। विश्व आर्थिक मंच द्वारा तैयार इंडेक्स में भारत को 58वां स्थान मिला है।

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