
चीन में रहस्यमयी कोरोना वायरस से मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। वायरस की चपेट में आने से अबतक 25 लोगों की मौत हो गई है।
जी न्यूज़ पर छपी खबर के अनुसार, इसके 830 मामलों की पुष्टि की गई है। उधर, मुंबई में भी इस वायरस से प्रभावित दो मरीजों को कस्तूरबा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।
सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक चाइनीज लड़की बड़े चाव से चमगादड़ का सूप पीते हुए नजर आ रही है। दावा किया जा रहा है कि इसी लड़की के जरिए कोरोनावायरस फैलना शुरू हुआ है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्तनधारी जीव चमगादड़ को खाने और उसका सूप पीने के बाद चाइनीज लड़की में कोरोना वायरस पनपा और उसी के जरिए दूसरे लोगों में फैल गया।
#ChinaPneumonia —
TERRIFYING #bat-eating Chinese woman..Back in 2003, the GLOBAL outbreak of #SARS killed more than 8,000 people. #Bat, civet cats are believed to be the origin of #virus
.#WuhanCoronavirus #coronavirus #China #WuhanPneumonia
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— @Dystopia
– #HongKong is NOT China (@Dystopia992) January 23, 2020
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दरअसल, एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि कोरोनावायरस (2019-एनसीओवी) से फैले घातक संक्रामक सांस की बीमारी के प्रकोप लिए मूल रूप से सांप और चमगादड़ स्रोत हो सकते हैं।
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#ChinaPneumonia — “Bat Soup” ondiners’ desk.#Wildlife animals hv ALWAYS been “delicacies” in #China, some even claim they can improve health & sex performance.
Let’s NOT forget #Bats are reservoirs for <60 viruses.#coronavirus #Wuhanpic.twitter.com/Eg7QEUxrsz
— @Dystopia
– #HongKong is NOT China (@Dystopia992) January 22, 2020
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रिसर्च में कहा गया है कि मरीज जो इस वायरस से संक्रमित हुए वे एक थोकबिक्री बाजार में वन्यजीवों के संपर्क में थे। जहां सीफूड, पोल्ट्री, सांप, चमगादड़ व फार्म के जानवर बेचे जाते थे। यहीं ये मरीज कोरोनावायरस के संपर्क में आए।
इस वायरस को डब्ल्यूएचओ ने ‘2019-एनसीओवी’ नाम दिया है।

जांचकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि 2019-एनसीओवी एक वायरस की तरह दिखता है जो चमगादड़ और अन्य कोरोनावायरस की अज्ञात स्रोत के संयोजन से बनता है।
आखिरकार शोध दल ने साक्ष्य का खुलासा किया कि 2019-एनसीओवी मानव में संक्रमण करने से पहले सांपों में रहता है।
वायरल रिसेप्टर-बाइंडिंग प्रोटीन के भीतर पुर्नसयोजन इसे सांप से मानव में संक्रमण की अनुमति देता है. शोध के निष्कर्षों को जर्नल ऑफ मेडिकल वायरोलॉजी में प्रकाशित किया गया है।
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