
जागरण डॉट कॉम के अनुसार, बार-बार कम तनख्वाह का ताना मारना तलाक की वजह बन गया। कोर्ट ने भी माना कि ऐसा करना क्रूरता है। कोर्ट ने इसी आधार पर पति की तलाक अर्जी स्वीकार कर ली।
पत्नी कम तनख्वाह के ताने के साथ पति को बार-बार कहती थी कि ऐसे गरीब, दरिद्र, भिखारी के साथ कौन रहेगा? चार साल पहले वह खुद ही पति को छोड़कर मायके में रहने लगी। आखिर पति ने तलाक के लिए कोर्ट में गुहार लगाई। कोर्ट ने माना कि पत्नी द्वारा पति को कम तनख्वाह का ताना देना एक तरह की क्रूरता है।
साईंकृपा कॉलोनी निवासी पल्लव बापट की शादी 24 दिसंबर 2012 को लातूर महाराष्ट्र निवासी माधुरी के साथ हुई थी। शादी के पहले ही पल्लव ने अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में माधुरी और उसके परिजन को बता दिया था कि वह प्राइवेट नौकरी करता है। शादी के कुछ दिन बाद ही माधुरी और उसके परिजन ने पल्लव को कम तनख्वाह का ताना देते हुए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
उन्होंने उससे कहा कि वह पुणे शिफ्ट हो जाए तो उसे अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी मिल सकती है, लेकिन पल्लव ने वृद्ध माता-पिता का हवाला देकर इनकार कर दिया।
इससे नाराज पत्नी पति को गरीबी का उलाहना देने लगी। वह कहती थी कि तुम्हारी तनख्वाह बहुत कम है। इतने पैसों में मेरा गुजारा संभव नहीं है।
वह अक्सर पल्लव को गरीब, दरिद्र और भिखारी कहते हुए सवाल उठाती थी कि ऐसे व्यक्ति के साथ कौन रहेगा। 15 मार्च 2015 को वह मां और भाई के साथ इंदौर से अपने मायके चली गई और इसके बाद लौटी ही नहीं।
पल्लव ने एडवोकेट अचला जोशी के माध्यम से कुटुम्ब न्यायालय में माधुरी से तलाक के लिए गुहार लगाई। एडवोकेट जोशी ने अपनी बात के समर्थन में न्याय दृष्टांत प्रस्तुत कर तर्क रखा कि पत्नी द्वारा पति को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना भी क्रूरता की श्रेणी में आता है।
कुटुंब न्यायालय की द्वितीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश रेणुका कंचन ने पल्लव की तरफ से तलाक के लिए आया आवेदन स्वीकारते हुए माना कि पति को कम तनख्वाह का उलाहना देना एक तरह की क्रूरता है।
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