
रूस की सरकार के एक उच्च पदस्थ सूत्र ने अमेरिकी एजेंटों के समक्ष कबूल किया है कि रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन का 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में सीधा दखल था। अमेरिकी मीडिया ने यह रिपोर्ट दी है।
इंडिया टीवी न्यूज़ डॉट कॉम पर छपी खबर के मुताबिक, सीएनएन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि दशकों से जानकारी दे रहे सूत्र की पुतिन तक पहुंच थी और उसने रूस के नेता की मेज तक अनेक उच्च स्तरीय दस्तावेजों की नकल पहुंचाई हैं।
नेटवर्क ने बताया कि जासूस को 2017 में रूस के बाहर भेज दिया गया, क्योंकि उन्हें भय था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी कैबिनेट खुफिया जानकारियों के लगातार लीक होने से उसका भंडाफोड़ हो सकता है। वहीं अमेरिका की खुफिया एजेंसी ने इसका खंडन किया।
एजेंसी में जनता के जुड़े मामलों के निदेशक ब्रिटनी ब्रेमेल ने सीएनएन से कहा, ‘‘ऐसे भ्रामक कयास लगाना कि राष्ट्रपति चुनाव के संचालन में हमारे देश की सबसे जटिल खुफिया तंत्र में एक कथित बाहरी अभियान घुस आया, उचित नहीं है।’’
न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा कि एजेंसी ने 2016 के अंत में उस सूत्र से जानकारी निकलवाने की पेशकश की थी लेकिन मुखबिर ने पारिवारिक समस्याओं का हवाला देते हुए इससे इनकार कर दिया था। समाचार पत्र में कहा गया कि इस घटना के बाद आशंका हुई कि मुखबिर डबल एजेंट हो गया है, लेकिन कई महीनों बाद वह मान गया।
इसमें कहा गया कि इस अज्ञात व्यक्ति द्वारा दी गई जानकारियों से अमेरिकी खुफिया एजेंसी इस नतीजे पर पहुंची कि 2016 के चुनाव में ट्रंप के पक्ष में और उनकी डेमोक्रेटिक विपक्षी हिलेरी क्लिंटन के विरोध में माहौल बनाने में पुतिन ने रूसी दखल की भूमिका तैयार की। टाइम्स के मुताबिक यह एजेंट सीआईए के लिए बेहद अहम था।
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