असगर अली की माँ ने बकरियां बेचकर बेटे को बनाया जज- बाप कपड़े सिलकर चलाते थे घर,देखिए

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने पीसीएस-जे 2018 परीक्षा के परिणाम जारी कर दिये हैं,जिसमें 610 छात्र छात्राओं का चयन हुआ है,इनमें एक नाम असगर अली का है जिसने गरीबी में अपनी मेहनत और लग्न से सबसे चीजों को पीछे छोड़कर जज बनकर नाम रौशन कर दिया है।

लखीमपुर खीरी जिले के बेहद गरीब परिवार में जन्में असगर अली पीसीएसजे में कामयाब होकर पूरे देश के छात्रों के सामने मिसाल कायम करी है, असगर अली के परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं है। उनकी मां बकरे-बकरियों को बेचकर असगर की पढ़ाई की फीस भरती थीं। उनकी इस मेहनत का फल आज असगर अली ने जज के रुप में मिला है। वहीं असगर अली के जज बनने पर उनके परिवार वाले बेहद खुश हैं।

यूपी पीसीएस-जे 2018 परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया गया है। जिसमें असगर अली में सफलता हासिल की है। 27 वर्षीय असगर अली जिले के मूसेपुर गांव के रहने वाले हैं। असगर के घर की आर्थिक हालत अच्छी नहीं है। उनकी मां बकरे-बकरियों को बेचकर असगर की पढ़ाई की फीस भरती थीं।

असगर पांच भाई और चार बहन हैं। असगर के परिवार में जमीन जायदाद के नाम पर गांव में बस दो कमरों का छोटा सा मकान और कुछ बकरियां हैं। अब्बू शाकिर अली टेलरिंग के अच्छे कारीगर थे। परिवार चलाने के लिए वह दो बेटों के साथ राजस्थान चले गए और वहां टेलरिंग का काम करने लगे।

असगर की फीस अदा करने और गृहस्थी चलाने के लिए मां मैसरजहां ने कशीदाकारी शुरू कर दी। मां चिकेन की कशीदाकारी से कुछ रुपये इकट्ठा कर बेटे की फीस अदा कर देती थी। जब एडमिशन या कोई बड़ा खर्चा आ जाता था तो घर में पली बकरियों में से एक को बेचकर फीस अदा करती थीं।

असगर अली ने हाई स्कूल पूर्व विधायक कौशल किशोर के स्कूल सेठ सधारी लाल से पास हुए। बीए करने बीएचयू चले गए। वहीं से एलएलबी, एलएलएम पास किया। असगर ने जेआरएफ भी पास किया। वर्तमान में असगर बीएचयू में ही पीएचडी कर रहे हैं। असगर की इस सफलता के बाद मां मैसरजहां को मुबारकबाद देने वालों का तांता लगा हुआ है।

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