Aimim ने दोबारा गठबंधन के लिये प्रकाश अंबेडकर के सामने रखी शर्त-जानिए क्यों टूटा था गठबंधन ?

नई दिल्ली: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले ऑल इण्डिया मजलिस ऐ इत्तेहादुल मुस्लिमीन और वंचित बहुजन अघाड़ी(वीबीए) के बीच गठबंधन टूट गया है,जिसके चलते दलित-मुस्लिम एकता का फार्मूला भी खतरे में आ गया है।इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने रविवार को कहा कि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन पर पुनर्विचार संभव है, बशर्ते कि वीबीए प्रमुख प्रकाश आंबेडकर असदुद्दीन ओवैसी से संपर्क करें और सीटों के बंटवारे पर उदार रूख अपनाएं।

ऑल इण्डिया मजलिस ऐ इत्तेहादुल मुस्लिमीन की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख इम्तियाज जलील ने हालांकि कहा कि उनकी पार्टी अब अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और अधिकतम 60 सीटों पर चुनाव लड़ने पर विचार कर रही है। साथ ही, जीत हासिल कर सकने वाले उम्मीदवारों के चयन को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि एआईएमआईएम ने वीबीए के साथ गठजोड़ बनाए रखने के लिए आखिरी पल तक अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिश की।

जलील ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘हमनें अपनी सीटों की संख्या घटा दी, दोनों पार्टियों के नेताओं ओवैसी और आंबेडक के बीच बैठकें हुईं, लेकिन यह सार्थक नहीं रहा। जब आंबेडकर ने यह दृढ़ फैसला किया कि वह सिर्फ आठ सीटें देंगे, तब वह ताबूत में आखिरी कील थी और ओवैसी ने कहा कि हम अकेले चुनाव लड़ेंगे।’’

यह पूछे जाने पर कि क्या पुनर्विचार हो सकता है और क्या अब भी एआईएमआईएम-वीबीए गठजोड़ के लिए दरवाजे खुले हैं, उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि यह इतना मुश्किल है कि इसे नहीं सुलझाया जा सके। यदि आंबेडकर बड़े भाई होने के नाते यह संकल्प लेते हैं कि ‘मैं गठजोड़ जारी रखना चाहता हूं, तो आइए फिर से शुरुआत करें।’

यदि वह ओवैसी से संपर्क करते हैं और वार्ता की मेज पर वापस आना चाहते हैं, तब हम राजी हो जाएंगे।’’ औरंगाबाद के सांसद ने कहा कि वीबीए इस बारे में कोई संतोषजनक कारण नहीं बता सका है कि क्यों उसने एआईएमआईएम को महज आठ सीटों की पेशकश की। यह पूछे जाने पर कि एआईएमआईएम क्यों चाहती है कि आंबेडकर सुलह के लिए आगे बढ़ें, जलील ने कहा कि जब वीबीए प्रमुख ने ओवैसी को एक ईमेल के जरिए सिर्फ आठ सीटों की पेशकश करने की सूचना दी, तब एआईएमआईएम प्रमुख बहुत निराश हुए थे।

उन्होंने से फोन पर कहा, ‘‘ओवैसी ने कहा है कि उन्होंने प्रकाश आंबेडकर को बहुत सम्मान दिया है…लेकिन ईमेल के जरिए दिया गया संदेश हैरान करने वाला था।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या एआईएमआईएम-वीबीए के बीच गठबंधन की संभावना है, जलील ने इसका जवाब ‘‘हां’’ में दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस और राकांपा की स्थिति डंवाडोल है। लोगों के पास विकल्प नहीं है, इसलिए वे विकल्प के तौर पर वीबीए और एआईएमआईएम की ओर देख रहे हैं।’’ दिलचस्प है कि गठजोड़ टूटने के बाद भी आंबेडकर इस बात पर जोर दे रहे हैं कि गठजोड़ अक्षुण्ण है। जलील ने कहा, ‘‘हम इस बारे में आश्वस्त नहीं हैं कि हम (अकेले) कितनी सीटों पर चुनाव लड़ने जा रहे हैं, लेकिन एक चीज बहुत स्पष्ट है कि यह संख्या 60 सीटों से अधिक नहीं होगी, यह अधिकतम है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अंतिम फैसला (सीटों पर) ओवैसी द्वारा लिया जाएगा।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या गठजोड़ टूटने के बाद दलित-मुस्लिम गठजोड़ भी टूट गया, जलील ने कहा कि यह पूरी तरह से गलत धारणा है कि दलित वोट सिर्फ दलित पार्टियों के साथ है। उल्लेखनीय है कि एआईएमआईम ने 2014 में 24 सीटों पर चुनाव लड़ा था और दो सीटों पर जीत हासिल की थी।

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