नई दिल्ली: अलीगढ़ की ऐतिसाहिक जामा मस्जिद की दुनियाभर में एक अलग पहचान है,ऊपरकोट इलाके में स्थित मुगलकाल में मोहम्मद शाह के शासन काल में कोल के गवर्नर साबित खान ने वर्ष 1724 में मस्जिद की तामीर शुरू कराई थी।
मस्जिद को मुकम्मल होने में चार साल लगे। वर्ष 1728 में तैयार मस्जिद में 17 गुंबद हैं, जिनमें करीब पांच हजार लोग नमाज पढ़ सकते हैं। मस्जिद में तीन बुलंद दरवाजे हैं। इन दरवाजों पर दो-दो गुंबद है।
जामा मस्जिद साबित खान द्वारा 1724 में बनवाई गयी थी, यह अलीगढ़ में सबसे पुरानी और भव्य मस्जिदों में से एक है। इसको बनने में 14 साल लगे थे। मस्जिद बलाई किले के शिखर पर स्थित है तथा यह स्थान शहर का उच्चतम बिंदु है।

अपने स्थिति की वजह से, इसे शहर के सभी स्थानों से देखा जा सकता है। असल में इस मस्जिद में जो गुंबद और मीनारे है उनमें शुद्ध सोना मढ़ा हुआ है और इतना सोने का जखीरा एशिया की किसी और मस्जिद में नहीं लगा है।

सदी के महानायक अभिनेता अमिताभ बच्चन ने ‘कौन बनेगा करोड़पति’ क्विज शो में एशिया में सबसे ज्यादा सोना लगे होने का सवाल किया था, जिसका जवाब कोई नहीं दे पाया था। फिर अमिताभ बच्चन ने खुद उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की जामा मस्जिद में सोना लगा होने का जवाब दिया था। हालांकि, इन गुंबद में कितना सोना लगा है, इसकी सटीक जानकारी किसी के पास नहीं है। सोना लगा होने की पुष्टि जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी भी कर चुकी है।

मस्जिद परिसर में हैं 73 शहीदों की कब्रें
जामा मस्जिद में 1857 गदर के 73 शहीदों की कब्रें भी हैं। मस्जिद परिसर में शहीदों की कब्र के चलते इसे गंज-ए-शहीदान (शहीदों की बस्ती) भी कहते हैं। 290 साल पुरानी मस्जिद में एक अनुमान के मुताबिक आठवीं पीढ़ी नमाज पढ़ रही है।
This post appeared first on The Inquilaab http://theinquilaab.com/ POST LINK Source Syndicated Feed from The Inquilaab http://theinquilaab.com Original Link- Source