सोनभद्र के काल्पनिक सोने से भारत को सोने की चिड़िया बनाने वाली मीडिया आख़िर कहां चूकी?

20 फ़रवरी 2020 को उत्तर प्रदेश के स्थानीय अखबारों में ख़बर छपी कि प्रदेश के सोनभद्र ज़िले में सोने की खान मिली है जिसमें 3 हज़ार 5 सौ टन सोना मौजूद है. 22 फ़रवरी तक पूरे भारतीय मीडिया में ये ख़बर फैल चुकी थी. बताया जाने लगा कि सोनभद्र में ज़मीन के नीचे दफ़न सोने की कीमत 12 लाख करोड़ की है और ये भारतीय गोल्ड रिज़र्व का 5 गुना होगा. मीडिया में आई रिपोर्ट्स में ज़िला लेवल के एक माइनिंग ऑफ़िसर के हवाले से ये ख़बरें बतायी गईं और और दावा किया गया कि इसके बाद भारत का गोल्ड रिज़र्व 626 टन से बढ़कर दुनिया में दूसरे नंबर पर आ जाएगा. पहले नंबर पर अमरीका का कब्ज़ा है जिसका गोल्ड रिज़र्व 8,133.5 टन का है. हालांकि रिपोर्ट में गोल्ड डिपॉज़िट का ज़िक्र था लेकिन चैनलों ने उसे पूरा सोना ही बता दिया और पूरे 3,500 टन भारतीय गोल्ड रिज़र्व में जोड़ दिए. इस तरह की रिपोर्टिंग दिन में तब तक चली जब तक भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया) ने ऐसी किसी भी खोज की ख़बरों को ख़ारिज नहीं किया. ऑल्ट न्यूज़ इस आर्टिकल में बतायेगा कि कैसे भारतीय मीडिया बिना क्रॉस चेक किये, ख़बर फैलाने लगा.

दैनिक जागरण में साफ़ छपा हुआ था कि खदान में जो खोज हुई है वो सोने के अयस्क की हुई है. अख़बार में बीएचयू के भूविज्ञान के प्रोफ़ेसर डॉक्टर रोहतास की कही बात भी है. प्रोफ़ेसर ने कहा कि खदान से कितना सोना निकलेगा, ये गोल्ड डिपॉज़िट की क्वालिटी पर डिपेंड करेगा. लेकिन अंग्रेज़ी मीडिया तक जब ये ख़बर पहुंची, उन्होंने इसे बेहद अलग तरीके से रिपोर्ट किया.

मामले की एकदम शुरुआत में 3,350 टन के सोने के अयस्क को 3,350 टन सोना कहने के मामले में एक ट्वीट सामने आता है. ये पोस्टकार्ड न्यूज़ नाम की विवादित वेबसाइट के फाउंडर महेश हेगड़े का ट्वीट था. हेगड़े ने ही ये स्थापित किया कि पूरा 3,350 टन सोना भारतीय गोल्ड रिज़र्व में शामिल कर लिया जाएगा. कई मेनस्ट्रीम मीडिया आउटलेट्स ने रट्टू तोते की तरह ये ख़बर हर जगह बांच दी.

21 फ़रवरी को ANI ने भी ये ख़बर छापी. मज़ेदार बात ये है कि ANI की स्टोरी में डिस्ट्रिक्ट माइनिंग ऑफिसर केके राय का बयान छापा था जिन्होंने क्लेम किया कि सोन पहाड़ी में 2700 मिलियन टन गोल्ड डिपॉज़िट है और और हरदी के मैदानों में 650 मिलियन टन है. सरकारी प्रसारणकर्ता दूरदर्शन ने भी इस ख़बर को ट्वीट के ज़रिये बताया और साथ ही माइनिंग अफ़सर के बयान को भी दिखाया. अब ये ट्वीट डिलीट हो गया है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया और इकॉनमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में, जिसका ज़िक्र कई जगहों पर हुआ, तमाम देशों के गोल्ड रिज़र्व की कीमत बताई गई और ये अनुमान लगाया गया कि इस खोज के बाद दुनिया भर में गोल्ड रिज़र्व के मामले में भारत यूनाइटेड स्टेट्स के बाद दूसरे नंबर पर पहुंच जाएगा.

ये ध्यान दिये जाने लायक है कि लगभग सभी मीडिया आउटलेट्स ने यही मान लिया कि जितना सोने का अयस्क है निकलने वाले सोने का वजन भी उतना ही होगा. ये अपने आप में हास्यास्पद है. ‘मनी कंट्रोल’ की एक रिपोर्ट में ये बताया गया था कि खदान से निकलने वाले सोने का असल वजन सोने के अयस्क का एक छोटा सा हिस्सा होगा. लेकिन इस रिपोर्ट में भी ये लिखा गया था कि इस खोज में मिलने वाला सोना मौजूदा भारतीय गोल्ड रिज़र्व का पांच गुना होगा.

सोने के अयस्क और असल सोने के बीच अंतर को दरकिनार करते हुए भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया जश्न में डूबा हुआ था. आशंका के अनुरूप, प्रदेश की सरकार को इस खोज का क्रेडिट मिलने लगा. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक हेडलाइन कह रही थी – Yogi Adityanath strikes gold (योगी आदित्यनाथ ने जीता सोना). ये सोशल मीडिया पर ख़ूब शेयर हुई और उत्तर प्रदेश के चीफ़ मिनिस्टर को ख़ूब वाहवाही मिली.

गौरतलब ये है कि फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने 21 फ़रवरी को ही ये रिपोर्ट किया था कि डिपॉज़िट में गोल्ड रिज़र्व 52,806 टन का है और वो लगभग 3.04 ग्राम प्रति टन ग्रेड का है.

कई टीवी न्यूज़ शो में ये ख़बर मज़ेदार तरीकों से दिखाई गई. इस दौरान किसी ने भी फ़ैक्ट चेक करने की ज़हमत नहीं उठाई. आज तक ने जहां ‘फिर सोने की चिड़िया’ कहा वहीं एबीपी न्यूज़ ने सोनभद्र की उस पहाड़ी को देश की तक़दीर बदलने वाली पहाड़ी कह दिया. इस खोज को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करने में किसी भी टीवी चैनल ने कोई कसर नहीं छोड़ी.

 

जब ये ख़बरें हर जगह चल रही थीं, इस वक़्त तक खदान मंत्रालय या फ़िर जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया से कोई कन्फ़र्मेशन नहीं मिला था. लेकिन हाउसिंग एंड अर्बन अफ़ेयर्स और सिविल एवियेशन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस ख़बर का संज्ञान लिया और ट्वीट कर के कहा कि सोनभद्र की खदान में बम्पर मात्रा में सोना मिलने के बाद भारत दुनिया में गोल्ड रिज़र्व के मामले में दूसरे नंबर पर पहुंच जाएगा.

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने तो मीडिया को बाइट भी दे दी और कहा कि देश आर्थिक रूप से और मज़बूत हो जायेगा.

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के डायरेक्टर एस गुरुमूर्ति ने ट्वीट किया और भारत की वर्ल्ड गोल्ड मार्केट को कंट्रोल करने की प्रबल संभावना जताई.

सोना मिला ही नहीं

मालूम ये चला कि GSI के डायरेक्टर जनरल (डीजी) एम श्रीधर ने पीटीआई को बताया, “सोनभद्र में GSI ने इतने बड़े गोल्ड रिज़र्व का कोई अनुमान नहीं लगाया है.”

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने एक प्रेस रिलीज़ जारी की और ये साफ़ किया कि फ़ील्ड सीज़न 1998-1999 और 1999-2000 में ये छानबीन की गई थी. उन्होंने कहा, “जिस ज़ोन में खनिज है, वहां की ग्रेडिंग है 3.03 ग्राम प्रति टन. ये एक अंदाजा है. इस तरह से 52,806.25 टन के अयस्क से असल में जो सोना मिलेगा वो लगभग 160 किलो होगा. मीडिया में दिखाए जा रहे 3,350 टन की बात ग़लत है.”

पहले भी कई बार इसी जगह सोना मिलने के बारे में बात हुई

सोने का अयस्क मिलने की छानबीन 1998-2000 में हुई और तबसे कोई भी नयी खोज सामने नहीं आई. अगर होती तो मीडिया इसे भी रिपोर्ट करती. ऑल्ट न्यूज़ ने जब खोजबीन की तो मालूम पड़ा कि अक्टूबर 2011 में आई खान मंत्रालय की एक रिपोर्ट में भी सोनभद्र की इस ‘खोज’ का ज़िक्र था. नीचे दी गई तस्वीर में सोनभद्र में मिले सोने के अयस्क की बात हुई है. यहां 0.053 मिलियन टन की बात होती दिख रही है. ये 53,000 टन के बराबर है और GSI की प्रेस रिलीज़ में दिए गए 52,806.25 टन से मिलती जुलती है.

सोने का अयस्क बनाम उससे निकलने वाला असली सोना

इस पूरे प्रकरण से ये साफ़ हुआ कि मीडिया और सोशल मीडिया यूज़र्स सोने के अयस्क और असल सोने में कन्फ्यूज़ थे. एक सोने की खदान में सोने का कितना अनुपात होगा, ये ग्राम प्रति मीट्रिक टन से दर्शाया जाता है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, एक अच्छी सोने की खदान में 8 से 10 ग्राम प्रति टन सोना होता है. औसत खदान में 4 से 6 ग्राम प्रति टन और ओपन पिट खदान में 1 से 4 ग्राम प्रति टन सोना होता है.

सोनभद्र में बताया गया कि 3.03 ग्राम प्रति टन ग्रेडिंग वाला अयस्क मिला है. अगर इसकी ग्रेडिंग 10 ग्राम प्रति टन भी होती तो भी 3500 टन के अयस्क से मात्र 35 किलो सोना निकलता. बाद में GSI ने जो आंकड़ा दिया, उसके हिसाब से 3.03 ग्राम प्रति टन ग्रेडिंग वाले 52,806.25 टन अयस्क से 160 किलो सोना मिल सकता है.

तो हुआ ये कि मीडिया आउटलेट्स ने बिना बेसिक फ़ैक्ट-चेक किये ग़लत जानकारी को हर जगह पहुंचा दिया. उन्होंने सोने के अयस्क के बारे में न ही पिछली रिपोर्टें पढ़ीं और न ही GSI से वेरिफ़ाई करना उचित समझा. इसकी वजह से उन्होंने न केवल सोने का वजन ग़लत कैलकुलेट किया बल्कि सोने के अयस्क और असल सोने की मात्रा भी एक ही समझ ली. पोस्टकार्ड न्यूज़ के फाउंडर की देखा देखी, इन्होंने भी पूरी संख्या भारत के गोल्ड रिज़र्व में जोड़ दी और ये फैला दिया कि भारत गोल्ड रिज़र्व के मामले में दूसरे नंबर पर पहुंच जाएगा. उन्होंने ये सोचने की भी ज़हमत नहीं उठाई कि अगर इतनी बड़ी खोज हुई है तो उसके बारे में GSI ने क्यूं इत्तेला नहीं की और क्यूं एक माइनिंग अफ़सर के हवाले से ये ख़बर सभी के सामने आई.

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