सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, क्रिप्टोकरेंसी पर लगे प्रतिबंध को हटाया!

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, क्रिप्टोकरेंसी पर लगे प्रतिबंध को हटाया!

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए देश में रिजर्व बैंक द्वारा Bitcoin जैसी क्रिप्टोकरेंसी पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है। इसके बाद अब इस लोग इन करेंसी में ट्रेडिंग कर सकेंगे।

 

नई दुनिया पर छपी खबर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज और ट्रेडर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। केंद्रीय बैंक ने 2018 में वर्चुअल करेंसी कही जानी वाली बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगा दिया था।

 

अप्रैल 2018 में रिजर्व बैंक ने वर्चुअल करेंसी पर लगाम कसने के लिहाज से इससे होने वाली ट्रेडिंग पर रोक लगा थी। इसका उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को निजी वर्चुअल करेंसी से बचाना था।

 

इस वर्चुअल करेंसी को सरकार ने अवैध भी माना था। क्रिप्टोकरेंसी के मामले में बिटकॉइन सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली क्रिप्टोकरेंसी है और अक्टूबर के बाद डॉलर के मुकाबले 10 हजार डॉलर का स्तर पाने में सफल रही।

 

बिटकॉइन के अलावा और भी क्रिप्टोकरेंसी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। इनमें Ethereum ने दोगुना कमाई की है वहीं रिपल्स की XRP ने 75 प्रतिशत का फायदा देखा है।

 

किसी भी देश में लेनदेन के लिए जो नोट और सिक्के चलन में होते हैं उन्हें करेंसी कहते हैं। करेंसी या तो कागज की होती है या किसी धातु की।

 

जैसे भारत में रुपये के नोट और सिक्के चलते हैं। हाल फिलहाल में वर्चुअल करेंसी की चर्चा है। मसलन, बिटकॉइन, नेमकाइन, लाइटकाइन और पीपीकाइन। इस तरह की वर्चुअल करेंसी को क्रिप्टोकरेंसी कहा जाता है।

 

दूसरे शब्दों में ऐसे समझें, क्रिप्टोकरेंसी एक ऐसी मुद्रा है जिसे डिजिटल माध्यम के रूप में निजी तौर पर जारी किया जाता है। यह क्रिप्टोग्राफी व ब्लॉकचेन जैसी डिस्ट्रीब्यूटर लेजर टेक्नोलॉजी (डीएलटी) के आधार पर काम करती है।

 

आसानी से समझने के लिए ब्लॉकचेन एक ऐसा बहीखाता है जिसमें लेनदेन को ब्लॉक्स के रूप में दर्ज किया जाता है और क्रिप्टोग्राफी का इस्तेमाल कर उन्हें लिंक कर दिया जाता है।

 

क्रिप्टोग्राफी में सुरक्षित तौर पर सूचनाओं को सहेजने और भेजने के लिए कोड का इस्तेमाल किया जाता है और सिर्फ वही व्यक्ति उस सूचना को पढ़ सकता है जिसके लिए वह भेजी गई है।

 

साभार- नई दुनिया

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