
अयोध्या केस की सुनवाई के छठे दिन रामलला विराजमान के लिए वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने बहस की शुरुआत स्कंद पुराण के जिक्र से की। हउन्होंने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि आज वो पहले ऐतिहासिक तथ्यों को रखेंगे, इसके बाद पुरातात्विक यानि ज़मीन की खुदाई में मिले सबूतों के ज़रिए उसे साबित करेंगे।
ज़ी न्यूज़ पर छपी खबर के अनुसार, उन्होंने स्कंद पुराण का हवाला देते हुए बताया कि कैसे सरयू नदी में स्नान के बाद जन्मभूमि दर्शन की परंपरा है। जस्टिस भूषण ने वैद्यनाथन से पूछा- ये पुराण कब लिखा गया था? वैद्यनाथन ने बताया- महाभारत के वक्त वेद व्यास ने इसकी रचना की थी।
वकील सीएस वैद्यनाथन ने सन् 1608-1611 के बीच अयोध्या की यात्रा करने वाले ब्रिटिश टूरिस्ट विलियम फिंच का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि फिंच ने “Early travels in India” नाम की पुस्तक लिखी जिसमें भारत आने वाले 7 टूरिस्ट के संस्मरण थे।
इसके साथ ही सीएस वैद्यनाथन ने कई टूरिस्ट की पुस्तकों का हवाला देकर साबित करने की कोशिश की कि कैसे वहां मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी। जस्टिस बोबडे ने पूछा-इस जगह को कब बाबरी मस्जिद के तौर पर जाना जाता था। वैद्यनाथन का जवाब- 19वीं सदी में…इससे पहले कभी मस्जिद के तौर पर नहीं जाना गया…
वकील वैद्यनाथन ने कहा कि राम जन्मभूमि पर स्थित किला बाबर ने तोड़ा था या औरंगजेब ने तोड़ा था इसको लेकर दो अलग राय है लेकिन राम अयोध्या के राजा थे और उनका जन्म वहां हुआ था इस पर कोई भ्रम नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- बाबरी मस्जिद का जिक्र कब आया?…वैद्यनाथन ने कहा- 19वीं सदी में, उससे पहले इसका कहीं जिक्र नहीं मिलता है। कोर्ट ने फिर पूछा- इस बात के क्या प्रमाण हैं कि बाबर ने मस्जिद बनाने का आदेश दिया था?
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