नई दिल्ली: मुस्लिम आरक्षण की मांग को लेकर महाराष्ट्र में काफी हंगामा होता रहा है,लेकिन एक बात ये जिन्न बोतल से बाहर होने जारहा है, बॉम्बे हाई कोर्ट ने राज्य में शिक्षा और नौकरी में मिलने वाले मुस्लिमों के 5 फीसदी आरक्षण पर 6 साल पहले रोक लगा दी थी। अब प्रदेश में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार बनने के बाद मुस्लिम आरक्षण पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस ने साफ किया है कि वह मुस्लिम आरक्षण के लिए सरकार पर दबाव बनाएगी।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्य के लोक निर्माण मंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और मुस्लिमों के लिए जल्द ही आरक्षण व्यवस्था लाई जाएगी। उन्होंने कहा, ‘हम इसको लेकर दबाव बनाएंगे। समन्वय समिति की मीटिंग में पार्टियों के नेताओं के साथ इस पर चर्चा करेंगे।’ बता दें कि न सिर्फ कांग्रेस बल्कि शिवसेना और एनसीपी भी पूर्व में मुस्लिम आरक्षण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जता चुके हैं।

साल 2018 में महाराष्ट्र विधानसभा में चर्चा के दौरान शिवसेना ने मुस्लिमों को 5 फीसदी आरक्षण दिए जाने की वकालत की थी। बता दें कि 2014 में मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने मुस्लिमों को 5 फीसदी आरक्षण और मराठों को 16 फीसदी आरक्षण की घोषणा की थी। हालांकि बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगाते हुए सिर्फ शिक्षा में मुस्लिमों को 5 फीसदी आरक्षण जारी रखा।
बता दें कि बीते साल जून में महाराष्ट्र की विपक्षी पार्टियों ने राज्य में शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मुस्लिमों को पांच प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की थी। इस मांग पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने यह कहते हुए उनकी बात का विरोध किया कि संविधान में धर्म आधारित आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।
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