
तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय के अध्यक्ष इस्माईल दमिर ने एक सप्ताह पहले कहा था कि रूस की मिसाइल रक्षा प्रणाली S-400 जुलाई के मध्य में अंकारा के हवाले की जायेगी। तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा है कि अगर अंकारा पर हमला किया गया तो वह रूस की मिसाइल रक्षा प्रणाली S-400 का प्रयोग करेगा।
पार्स टुडे डॉट कॉम के अनुसार, रजब तय्यब अर्दोग़ान ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि तुर्की ने अपनी रक्षा के लिए रूस से S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली ख़रीदी है। तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय के अध्यक्ष इस्माईल दमिर ने एक सप्ताह पहले कहा था कि रूस की मिसाइल रक्षा प्रणाली S-400 जुलाई के मध्य में अंकारा के हवाले की जायेगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इससे पहले रूस से S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की खरीदारी के संबंध में तुर्की को चेतावनी दी थी और कहा था कि अगर तुर्की ने रूस से S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदी तो उसे कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।
दिसंबर 2017 में रूस और तुर्की के मध्य मिसाइल रक्षा प्रणाली S-400 की खरीदारी के समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। तुर्की के राष्ट्रपति ने जो यह कहा है कि अगर उनके देश पर हमला किया गया तो अंकारा S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली का प्रयोग करेगा तो उनका यह बयान तुर्की और अमेरिका के बीच खाई के अधिक होने का सूचक है।
वर्ष 2016 में तुर्की में जो विफल सैन्य विद्रोह हुआ था उसी समय से दोनों देशों के बीच मौजूद दूरियां स्पष्ट होने लगी थीं। उस विफल सैन्य विद्रोह के बाद तुर्की ने अमेरिका पर आरोप लगाया था कि इसके पीछे अमेरिका का हाथ है।
विफल सैन्य विद्रोह के नेता फत्हुल्लाह गूलेन अमेरिका में हैं और उन्हें अमेरिकी समर्थन प्राप्त है इस बात के दृष्टिगत तुर्की के आरोप की पुष्टि होती है। इस समय प्रतीत यह हो रहा है कि अर्दोग़ान इस बात से चिंतित हैं कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप कहीं तुर्की पर सैनिक हमला न कर दें। इसी वजह से वह स्वयं को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से निकट कर रहे हैं और अमेरिकी धमकियों के मुकाबले में दृष्टिकोण अपना रहे हैं।
रोचक बात यह है कि दूसरे देशों पर प्रतिबंध लगाने की नीति की अनुपयोगीता प्रतिदिन स्पष्ट होती जा रही है और अमेरिका अपनी विफलताओं की भरपाई के लिए दूसरे देशों पर अधिक प्रतिबंध लगाने की सोच में है।
बहरहाल अमेरिकी प्रतिबंधों से मुकाबले के लिए तुर्की और दूसरे देशों को चाहिये कि वे अधिक राजनीतिक और आर्थिक समरसता के साथ एक दूसरे से सहकारिता में वृद्धि करें।
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