
मुंबई की एक निचली अदालत ने 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में मुख्य आरोपी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की अदालत में हफ्ते में एक बार हाजिर होने से स्थायी छूट देने की मांग करने वाली याचिका गुरुवार को खारिज कर दी। मध्य प्रदेश के भोपाल से नवनिर्वाचित सांसद ठाकुर ने अपनी याचिका में कहा कि वह कई तरह की बीमारियों से जूझ रही हैं और इस हालत में नहीं हैं कि अदालत में मौजूद रह सकें।
ठाकुर ने यह भी कहा कि वह साध्वी हैं और साधना के लिए उन्हें कठोर अनुशासन में रहना होता है। इसके अलावा सांसद होने के नाते और पार्टी के आदेश पर उन्हें संसद के सत्रों में भाग लेना होता है। इसलिए उनके लिए यह संभव नहीं है कि वह हर सप्ताह मुंबई की यात्रा करके अदालत में हाजिर हो सकें।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के विशेष न्यायाधीश वी एस पडालकर ने इसपर कहा कि ये आधार तर्कसंगत नहीं हैं। हालांकि, न्यायाधीश ने गुरुवार को उनको गैरहाजिर होने की अनुमति दे दी।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितम्बर, 2008 को हुये धमाकों में छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे। जांच एजेंसी के अनुसार ये धमाके एक चरमपंथी हिंदू संगठन ने किए थे और ठाकुर इस संगठन में शामिल थीं।
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