नई दिल्ली: अखिल भारत हिन्दू महासभा की केरल ईकाई द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दर्ज याचिका को खारिज कर दिया है,चीफ जस्टिस रंजन गोगोई,जस्टिस दीपक गुप्ता,जस्टिस अनिरूद्ध बोस की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने केरल हाईकोर्ट के इस आदेश को सही ठहराया कि यह जनहित याचिका प्रायोजित है और ‘सस्ते प्रचार के लिये’ इसका इस्तेमाल हो रहा है।
केरल हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील खारिज करते हुये पीठ ने सवाल किया, ”आप कौन हैं? आप कैसे प्रभावित हैं? हमारे सामने प्रभावित लोगों को आने दीजिये.” अखिल भारत हिन्दू महासभा की केरल इकाई के अध्यक्ष स्वामी देतात्रेय साई स्वरूप नाथ ने जब न्यायाधीशों के सवालों का जवाब मलयाली भाषा में देने का प्रयास किया तो पीठ ने कोर्ट कक्ष में उपस्थित एक अधिवक्ता से इसका अनुवाद करने का अनुरोध किया।

अधिवक्ता ने पीठ के लिये अनुवाद करते हुये कहा कि स्वामी याचिकाकर्ता हैं और उन्होंने केरल हाईकोर्ट के 11 अक्टूबर, 2018 के आदेश को चुनौती दी है. इस पर पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में इस तथ्य का उल्लेख किया है कि इस याचिका पर सुनवाई होने से पहले ही इसके बारे में मीडिया में खबरें थीं और यह प्रायोजित याचिका लगती है जिसका मकसद सस्ता प्रचार पाना है. पीठ ने कहा, ”हमें हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने की कोई वजह नजर नहीं आती है. याचिका खारिज की जाती है।
आपको बता दें कि ऐसी ही एक याचिका पर अगस्त 2016 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महिलाओं को मुंबई स्थित मशहूर हाजी अली दरगाह की मजार तक जाने पर लगे प्रतिबंध को हटाने का आदेश दिया था. तब हाईकोर्ट ने कहा था कि महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध संविधान में दिए गए उनके मूलभूत अधिकारों का हनन है. हालांकि, हाईकोर्ट के इस फैसले को दरगाह ट्रस्ट की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई थी. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था. इसके बाद पहली बार महिलाओं ने मशहूर हाजी अली दरगाह के अंदरूनी हिस्सों में प्रवेश किया था।
गौरतलब है कि महिलाओं के पक्ष में कई फैसलों के आने के बाद अब मुस्लिम महिलाओं के लिए भी मस्जिद में नमाज पढ़ने देने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है. सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद केरल में मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश के लिए हिंदू महासभा की ओर से एक याचिका दाखिल की गई थी. सुप्रीम कोर्ट पिछले साल ही केरल स्थित सबरीमाला मंदिर में भी सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत दे चुका है. हालांकि, दक्षिणपंथी संगठनों की ओर से राज्य में इस आदेश का विरोध जारी है।