मरांडी की वापसी बीजेपी के लिए बनी गले की फांस, उनके आरोपों की हुई जांच, तो फिर क्या करेंगे शाह और दास!

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने बीजेपी में आकर घर वापसी तो कर ली है, लेकिन पिछले 14 साल में उन्होंने बीजेपी सरकारों पर जो आरोप लगाए हैं, उनकी जांच बढ़ी और लोग फंसे, तो फिर पार्टी क्या करेगी? यह सवाल बीजेपी नेताओं को भी परेशान कर रहा है।

उदाहरण सामने ही है। साल 2016 के राज्यसभा चुनाव के बाद बाबूलाल मरांडी ने एक सीडी जारी कर आरोप लगाया था कि 1990 बैच के आईपीएस अफसर अनुराग गुप्ता ने अपने पद का दुरुपयोग कर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को धमकी दी। उन्होंने दावा किया था कि पूर्व मंत्री योगेंद्र साव की पत्नी और तब कांग्रेस की विधायक रहीं निर्मला देवी को वोट देने से रोकने के लिए एडीजी अनुराग गुप्ता ने योगेंद्र साव को दो दिनों के अंतराल में 26 बार फोन कर दबाव बनाने की कोशिश की। तब योगेंद्र साव अपने खिलाफ दर्ज कई मुकदमों में कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।

मरांडी के अनुसार एडीजी अनुराग गुप्ता ने उन्हें कथित तौर पर कहा था कि रघुवर दास की सरकार 3-4 साल रहेगी। आप मेरी बात मानिए तो आपको बहुत ऊंचाई तक ले जाएंगे। बात नहीं मानने पर आप को दिक्कत होगी। उनकी बातचीत की सीडी किसी स्रोत से बाबूलाल तक पहुंची और उन्होंने चुनाव आयोग से इसकी शिकायत की। उन्होंने सबूत के बतौर वह सीडी भी चुनाव आयोग को सौंपी थी और इसकी जांच कराने की मांग की थी।

इसके बाद आयोग के प्रधान सचिव वीरेंद्र कुमार ने रांची आकर इस मामले की जांच की। फिर 13 जून, 2017 को चुनाव आयोग ने एडीजी अनुराग गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और विभागीय कार्यवाही का निर्देश दिया था। इसके बाद एफआईआर तो दर्ज करा दी गई, लेकिन उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही नहीं की गई। तब से यह मामला ठंडे बस्ते में था, क्योंकि इस मामले का सीधा संबंध तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास से था।

पुलिस ने उनके राजनीतिक सलाहकार अजय कुमार के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज की थी। तभी यह भी चर्चा चली थी कि मुख्यमंत्री रघुवर दास स्वयं योगेंद्र साव के घर गए और उनकी विधायक पत्नी निर्मला देवी पर क्राॅस वोटिंग करने या वोटिंग से अनुपस्थित रहने का दबाव बनाया। इसके भी प्रमाण सार्वजनिक किए गए लेकिन न तो अनुराग गुप्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई और न रघुवर दास के खिलाफ किसी ने कुछ बोला।

लेकिन अब राज्य में हेमंत सोरेन की सरकार है। उसने हाल में झारखंड पुलिस के अपर महानिदेशक (एडीजी) अनुराग गुप्ता को संस्पेंड करने का निर्णय लिया। उच्चस्तरीय सूत्रों के मुताबिक, इस सीडी में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का भी कई बार जिक्र हुआ है, इसलिए उन पर भी कार्रवाई हो सकती है। कम-से-कम उनसे पूछताछ तो पुलिस करेगी ही। वैसे, राजनीतिक क्षेत्रों में कहा जा रहा है कि बीजेपी के ‘वजीर’ से बीजेपी के ही‘बादशाह’ को शिकस्त देकर हेमंत सोरेन ने बड़े संकेत दिए हैं।

यह मसला अब भी कई तरह से गंभीर है। तब योगेंद्र साव की पत्नी निर्मला देवी कांग्रेस पार्टी की विधायक हुआ करती थीं। अब उनकी बेटी अंबा प्रसाद कांग्रेस की एमएलए हैं। उन्होंने हाल ही में आरोप लगाया है कि रघुवर दास ने मुख्यमंत्री रहते हुए उनके पिता योगेंद्र साव को पांच करोड़ रुपये की पेशकश की थी, ताकि वे मेरी मां (तब की विधायक निर्मला देवी) को राज्यसभा चुनाव में वोट देने से रोक सकें। बकौल अंबा प्रसाद, उनका ऑफर ठुकराने के कारण तत्कालीन बीजेपी सरकार ने राजनीतिक विद्वेष के कारण उनके परिवार को तबाह किया और उनके पिता-मां के खिलाफ झूठे आरोपों में मुकदमे करा दिए। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और रघुवर दास के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की है।

यह तो सिर्फ एक मामला है। बाबूलाल मरांडी ने झारखंड विकास मोर्चा में रहते हुए तत्कालीन रघुवर दास सरकार के खिलाफ कई संगीन आरोप लगाए थे। कानूनी लड़ाइयां भी लड़ी थीं। बीजेपी के खिलाफ दलबदल का मामला हाईकोर्ट तक में दर्ज कराया था। अब झारखंड में सत्ता की चाबी झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और आरजेडी के गठबंधन की सरकार के पास है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इसके मुखिया हैं। ऐसे में जेएमएम प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य के उस बयान को गंभीरता से लेना चाहिए, जिसमें उन्होंने कहा है कि हेमंत सोरेन की सरकार मैनहर्ट घोटाले की जांच भी करा सकती है। यह घोटाला रघुवर दास के नगर विकास मंत्री रहते हुए हुआ था।

मतलब साफ है कि बाबूलाल के तब छोड़े तीर उनकी ही पार्टी के लोगों को अब भी घायल करते रहेंगे।

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