नई दिल्ली: बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं इसको लेकर तमाम राजनीतिक पार्टियों ने कमर कस रखी है,वहीं किशनगंज उपचुनाव में ओवैसी ने भी एंट्री मार ली है,इस बढ़ते जनाधार से राष्ट्रीय जनतादल और काँग्रेस परेशान है।
बिहार सीमाँचल इलाका कांग्रेस व आरजेडी का गढ़ रहा है, लेकिन ओवैसी ने यहां सेंधमारी कर दी है। आरजेडी ने इसे गंभीरता से लिया है। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) व राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की पोल खोल यात्रा सीमांचल से ही शुरू करने के पीछे ओवैसी फैक्टर (Owaisi Factor) बताया जा रहा है।

बिहार की सियासत, खासकर मुस्लिम बहुल सीमांचल में सीएए व एनआरसी का मुद्दा बड़ा फैक्टर बनता दिख रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) इसे हर हाल में लागू करना चाहती है। गुरुवार को भी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) ने वैशाली में आयोजित जनसभा में सीएए व एनआरसी के संबंध में बीजेपी व केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) के स्टैंड साफ कर गए हैं। दूसरी ओर आरजेडी व कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल इसके खिलाफ हैं। इस मुद्दे पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में बीजेपी की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) भी बिहार में एनअरसी को लागू नहीं करने के पक्ष में है।
स्पष्ट है कि सीएए व एनआरसी को लेकर बिहार की राजनीति में अभी सबकुछ स्पष्ट नहीं है। आने वाले दिनों में यह कोई बड़ा सियासी उलटफेर कर दे तो आश्चर्य नहीं। इस उहापोह के बीच सभी दल अपने वोट बैंक को सहेजने में जुट गए हैं। सीएए व एनआरसी के खिलाफ तेजस्वी यादव की सीमांचल से हो रही यात्रा अपने मुस्लिम वोट बैंक (Muslim Vote bank) को पकड़ने की कोशिश बतायी जा रही है।
सीमांचल आरजेडी व कांग्रेस का गढ़ रहा है, लेकिन वहां ओवैसी की पैठ बढ़ती जा रही है। गत अक्टूबर के विधानसभा उपचुनाव (Assembly By Election) में एआइएमआइएम ने किशनगंज (Kishanganj) की उस मुस्लिम बहुल सीट को झटक कर चौंका दिया था, जिसपर कांग्रेस का कब्जा रहा था।
किशनगंज में 70 फीसद मुस्लिम आबादी है। वहां से एआइएमअाइएम के कमरूल होदा (Kamrul Huda) ने बीजेपी की स्वीटी सिंह (Sweety Singh) को करीब 10 हजार वोटों के छोटे अंतर से पराजित किया। आरजेडी व कांग्रेस के गढ़ रहे इस विधानसभा क्षेत्र में महागठबंधन के कांग्रेस प्रत्याशी का स्थान तीसरे नंबर पर रहा। आरजेडी के समर्थन के बावजूद कांग्रेस का यह हाल महागठबंधन (Grand Alliance) के लिए बुरे संकेत हैं। गत लोक सभा चुनाव में भी किशनगंज से महागठबंधन के कांग्रेस प्रत्याशी मो. जावेद (Md. Javed) की एनडीए के जेडीयू प्रत्याशी महमूद अशरफ (Mahmood Ashraf) से कांटे की टक्कर हुई, जिसमें कांग्रेस प्रत्याशी की करीब 34 हजार वोटों से जीत हुई।
ओवैसी की बात करें तो उनकी नजर मुस्लिम बहुल सीमांचल के अररिया (Araria), किशनगंज (kishanganj), पूर्णिया (Purnia) और कटिहार (Katihar) पर है। वे मुस्लिम जनभावना (Muslim Sentiment) उभारना बखूबी जानते हैं। इस बीच उन्हें सीएए व एनआरसी जैसा मुसलमानों से जुड़ा बड़ा मुद्दा भी मिल गया है। ऐसे में आश्चर्य नहीं कि एआइएमआइएम ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में सीमांचल की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। इससे आरजेडी व कांग्रेस की नींद उड़नी स्वाभाविक है।
दरअसल, सीमांचल में ओवैसी अपनी स्थिति लगातार मजबूत बनाते जा रहे हैं। इससे मुस्लिम वोट बैंक में हो रहे विभाजन से आरजेडी व कांग्रेस को बड़ा नुकसान हो रहा है। माना जा रहा है कि सीएए और एनआरसी के विरोध में तेजस्वी की यात्रा सीमांचल में असदउद्दीन ओवैसी की पैठ को रोकने की भी कोशिश है।
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