
पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह के बीजेपी में शामिल होते ही बाबरी विध्वंस मामले में सीबीआई ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कल्याण सिंह को तलब करने की अपील की है. दरअसल, कल्याण सिंह राजस्थान के राज्यपाल थे, यह संवैधानिक पद है, जिसके चलते सीबीआई उनके खिलाफ अर्जी नहीं दाखिल कर पा रही थी. राज्यपाल के पद से हटने के बाद सोमवार को कल्याण सिंह ने एक बार फिर से बीजेपी ज्वाइन कर लिया, जिसके बाद सीबीआई ने उनके खिलाफ अर्जी दाखिल कर दी. इसी मामले में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्यगोपाल दास जमानत पर हैं.
कोर्ट ने पहले कहा था कि 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह (Kalyan Singh) को मुकदमे का सामना करने के लिए आरोपी के तौर पर बुलाया नहीं जा सकता, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राज्यपालों को संवैधानिक छूट मिली हुई है.
संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राष्ट्रपति और राज्यपालों को उनके कार्यकाल के दौरान आपराधिक तथा दीवानी मामलों से छूट प्रदान की गई है. इसके अनुसार, कोई भी अदालत किसी भी मामले में राष्ट्रपति या राज्यपाल को समन जारी नहीं कर सकती.
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