पहलू खान मॉब लिंचिंग: SIT जांच में बड़ा खुलासा होने की उम्मीद!

पहलू खान मॉब लिंचिंग: SIT जांच में बड़ा खुलासा होने की उम्मीद!

अलवर के बहुचर्चित पहलू खान भीड़ हिंसा मामले में एडीजे अदालत ने छह नाबालिगों को बरी कर दिया था। जिसके बाद इस मामले की जांच के लिए एक एसआईटी गठित की गई। एसआईटी टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर ली है। बताया जा रहा है कि टीम सोमवार शाम को पुलिस मुख्यालय में अधिकारियों को यह रिपोर्ट सौंपेगी।

अमर उजाला पर छपी खबर के अनुसार, एसआईटी ने अपनी जांच में माना कि पहलू खान की पिटाई के दो वीडियो सामने आए थे। इनमें एक वीडियो काफी ज्यादा वायरल हुआ था। जांच में एसआईटी ने पाया कि जिस मोबाइल से वीडियो बनाया गया था उसे पुलिस ने जब्त कर लिया था।

लेकिन सरकारी वकील ने सबूत के तौर पर उस मोबाइल को मंगवाया ही नहीं। जब्त किया गया यह मोबाइल एसआईटी को मालखाने से बरामद हुआ था।

एसआईटी ने जांच में पाया कि जांच अधिकारी ने वीडियो के फोटो बनाकर चार्जशीट में सबूत के तौर पर लगाए, मगर इन फोटो के बारे में एफएसएल से सर्टिफिकेट शामिल ही नहीं किया।

रिपोर्ट में पाया गया कि एक अप्रैल को शाम करीब सात बजे पहलू से मारपीट हुई। जिसके बाद उसे 7:50 बजे अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने 11:50 बजे पहलू का बयान दर्ज किया।

बयान में उसने कुछ लोगों के नाम बताए। जिसके आधार पर पुलिस ने तीन घंटे बाद केस दर्ज कर लिया। अदालत में एएम और पीएम को लेकर गलतफहमी हुई और एपीपी मामले को साफ नहीं कर पाए।

आरोपियों की रिहाई के समय कुछ सवाल उठे। जिनमें ये कि जांच अधिकारी ने घटना का वीडियो बनाए जाने वाले मोबाइल को जब्त नहीं कर गंभीर लापरवाही बरती। जांच अधिकारी ने पहलू का पर्चा बयान दर्ज करने के 16 घंटे बाद थाने पर मुकदमा दर्ज करने के लिए पेश किया।

जांच अधिकारी ने पर्चा बयान में नामजद आरोपियों को लेकर क्या जांच की, इसको लेकर अदालत में कोई सबूत पेश नहीं किए गए। एफआईआर में नामजद आरोपियों की जगह अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया।

वहीं, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने अपनी जांच में ये माना कि जिस मोबाइल से घटना का वीडियो बनाया गया, उसे पुलिस ने सबूत के तौर पर जब्त किया था, लेकिन वह मालखाने में ही रखा रह गया। सरकारी वकील ने इसे सबूत के तौर पर पेश नहीं किया।

घटना के अगले दिन 3:50 एएम पर मामला दर्ज कर लिया गया था जबकि अदालत में सुनवाई के दौरान इसे 3:50 पीएम माना। इसके आधार पर अदालत ने माना कि घटना के 16 घंटे बाद मामला दर्ज हुआ। उन्होंने अपनी जांच में पाया कि सरकारी वकील सही तरीके से पैरवी नहीं कर पाए।

गौरलब है कि हरियाणा के नूंह निवासी पहलू खान अपने बेटों के साथ एक अप्रैल 2017 को जयपुर से गाय व अन्य पशुओं को खरीद कर हरियाणा ले जा रहा था।

इस दौरान नेशनल हाइवे नंबर आठ पर अलवर के बहरोड़ में कुछ लोगों ने पहलू खान की गाड़ी को रोक लिया व गोस्तकरी के आरोप में मारपीट की। जिसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान चार अप्रैल को उसकी मौत हो गई।

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