नई दिल्ली: परमवीर चक्र विजेता बहादुर सैनिक जिनकी वीरता को ऐतिहास में हमेशा याद किया जाएगा वीर अब्दुल हमीद की पत्नी रसूल बीबी का निधन हो गया है,परिवार का कहना है कि उनकी तीन चार दिन से तबियत खराब थी।
रसूलन बीबी ने मौसम बदलने की बात कहते हुए वाराणसी जाने से भी मना कर दिया था और दवा लेकर घर पर ही आराम कर रही थीं. उनका बेटा तबीयत खराब होने की खबर सुनकर गुरुवार को घर आ गया था. उन्होंने दोपहर लगभग दो बजे अंतिम सांस ली।
Rasoolan Bibi, wife of Param Vir Chakra awardee Abdul Hamid (who lost his life in 1965- Indo-Pak war), passed away in Gazipur, today. (file pic) pic.twitter.com/E2Uf7440fY
— ANI UP (@ANINewsUP) August 2, 2019
रसूलन बीवी के निधन की खबर फैलने के बाद लोगों ने शोक जताया. उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने परमवीर चक्र विजेता (मरणोपरान्त) वीर अब्दुल हमीद की पत्नी रसूलन बीवी के निधन पर शोक व्यक्त किया है. राज्यपाल ने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए दुखी परिजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शोक व्यक्त किया है. उन्होंने अपने शोक संदेश में कहा है कि रसूलन बीवी वीर नारी थीं. दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए उन्होंने शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की है।
#UPCM श्री @myogiadityanath ने परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद की पत्नी रसूलन बीवी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। गाजीपुर निवासी वीर अब्दुल हमीद ने 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में पराक्रम दिखाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था।
— CM Office, GoUP (@CMOfficeUP) August 2, 2019
पाकिस्तान के खिलाफ वर्ष 1965 की जंग में दुश्मन के छक्के छुड़ाने वाले, पाकिस्तान के पैटन टैंकों से लोहा लेने वाले अदम्य साहसी अब्दुल हमीद को मरणोपरांत परमवीर चक्र प्रदान किया गया था।
अब्दुल हमीद की पत्नी रसूलन बीबी अपने परिवार के साथ गाजीपुर में ही रह रही थीं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर देश में सेना के शीर्ष अधिकारियों के बीच उनकी अलग पहचान थी. देश में भारतीय सेना से जुड़े आयोजनों में भी उनको बुलाया जाता रहा है।
गाजीपुर जिले में भी अब्दुल हमीद की स्मृतियों को सहेजने के लिए उनके प्रयासों की लोग मुरीद थे।
रसूलन बीबी ने जनवरी 2017 में सेना प्रमुख नियुक्त किए जाने के बाद जनरल बिपिन रावत से मुलाकात की थी और उनसे आग्रह किया था कि उनके जीते जी वह एक बार शहीद को श्रद्धांजलि देने उनके स्मारक आएं।

रसूलन बीवी की वृद्धावस्था को देखते हुए जनरल रावत ने गाजीपुर जाने का फैसला किया. हर साल 10 सितंबर को शहीद अब्दुल हमीद का परिवार उनके लिए एक सभा का आयोजन करता है।