नागरिकता कानून में बदलाव को लेकर गृह मंत्रालय ने दिए संकेत !

नागरिकता कानून में बदलाव को लेकर गृह मंत्रालय ने दिए संकेत !

गृह मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि नागरिकता (संशोधन) कानून मुसलमानों सहित किसी भारतीय नागरिक को प्रभावित नहीं करेगा और संविधान में दिए गये मौलिक अधिकारों का लाभ उन्हें मिलता रहेगा। मंत्रालय ने इस मुद्दे पर गलत सूचना फैलाए जाने के लिए चलाए जा रहे अभियान को रोकने की कोशिश के तहत यह कहा है।

गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस कानून का किसी विदेशी के भारत में निर्वासन से कोई लेना देना नहीं है। इस बीच, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने मंगलवार को सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा कि नागरिकता (संशोधन) कानून किसी भारतीय के खिलाफ नहीं है और इस कानून को समझना तथा इस बारे में फैलाई जा रही गलत सूचना के खिलाफ जागरूक होना जरूरी है।

वहीं, इस विवादित कानून पर प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) के जवाब में गृह मंत्रालय ने कहा, ‘‘गलत सूचना फैलाने के लिए एक अभियान चलाया जा रहा है। नागरिकता (संशोधन) कानून मुसलमान नागरिकों सहित किसी भारतीय नागरिक को प्रभावित नहीं करता है।’’ दरअसल, इस नये कानून के विरोध में पिछले कुछ दिनों से दिल्ली सहित देश के कुछ हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। एफएक्यू के जवाब गृह मंत्रालय ने जारी किए हैं।

गृह मंत्रालय ने कहा कि नया कानून सिर्फ हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई धर्मावलंबी विदेशियों के लिए हैं, जो अपने धर्म को लेकर प्रताड़ना का सामना करने के चलते पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हैं। मंत्रालय ने कहा कि यह कानून इन तीन देशों सहित किसी अन्य देश से भारत आए मुसलमानों सहित अन्य विदेशियों पर लागू नहीं होगा। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया कि इस नये कानून का किसी विदेशी के भारत में निर्वासन से कोई लेना देना नहीं है। गृह मंत्रालय ने कहा कि किसी विदेशी के निर्वासन की प्रक्रिया, चाहे उसका धर्म या देश कुछ भी हो, विदेशी नागरिक अधिनियम 1946 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920 के मुताबिक क्रियान्वित की जाती है।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘ ये दोनों कानून सभी विदेशियों के भारत में प्रवेश एवं निकास, यहां ठहरने, देश में यहां-वहां आने-जाने को शासित करते हैं, भले ही उनका धर्म कुछ भी हो। इसलिए, सामान्य निर्वासन प्रक्रिया भारत में रह रहे किसी अवैध विदेशी पर लागू होगी। ’’ यह जवाब इस सवाल पर दिया किया गया क्या इन देशों से आए मुसलमान आव्रजकों को नये कानून के तहत वापस भेजा जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि किसी विदेशी नागरिक का निर्वासन एक बखूबी विचारित न्यायिक प्रक्रिया है जो स्थानीय पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों की एक उचित जांच पर आधारित है, जिसके तहत इस तरह के अवैध विदेशियों का पता लगाया जाता है।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘यह सुनिश्चित किया गया है कि इस तरह के अवैध विदेशी को उसके देश के दूतावास द्वारा उचित यात्रा दस्तावेज जारी किए गए हों ताकि जब उसे निर्वासित किया जाए तब उसके देश के अधिकारी उपयुक्त रूप से उसकी अगवानी कर सकें। ’’ गृह मंत्रालय ने कहा कि असम में निर्वासन की प्रकिया विदेशी नागरिक अधनियम, 1946 के तहत ऐसे किसी व्यक्ति के ‘विदेशी’ निर्धारित होने पर ही होती है। मंत्रालय ने कहा, ‘‘इसके बाद वह निर्वासित किए जाने लायक हो जाता है। इसलिए, इस प्रक्रिया में कुछ भी अपने-आप, मशीनी या भेदभावपूर्ण तरीके से नहीं होता।

राज्य सरकारों और उनके जिला स्तर के अधिकारियों के पास विदेशी नागरिक अधिनियम की धारा तीन और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920 की धारा पांच के तहत केंद्र सरकार की शक्तियां प्राप्त हैं, जिसके तहत वे किसी अवैध विदेशी का पता लगा सकते हैं, उसे हिरासत में ले सकते हैं और उसे निर्वासित कर सकते हैं।’’ यह सवाल कि क्या पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुसलमान भारतीय नागरिकता कभी नहीं प्राप्त कर सकते, मंत्रालय ने जवाब दिया-‘‘नहीं’’।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘किसी भी श्रेणी के किसी विदेशी के एक निर्धारित अवधि तक भारत में रहने से उसके भारत की नागरिकता हासिल करने की मौजूदा कानूनी प्रक्रिया (नागरिकता कानून की धारा छह) या पंजीकरण के जरिए (इस कानून की धारा पांच) नागरिकता हासिल करना जारी रहेगा। संशोधित नागरिकता कानून इसमें किसी तरह का संशोधन या बदलाव नहीं करता है।’’ गृह मंत्रालय ने कहा कि इन तीनों देशों से आए सैकड़ों मुसलमानों को पिछले कुछ बरसों में भारतीय नागरिकता दी गई है।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘योग्य पाए जाने पर, भविष्य में आने वाले ऐसे सभी प्रवासियों को भी भारतीय नागरिकता मिलेगी, चाहे उनकी संख्या या धर्म कुछ भी क्यों न हो।’’ मंत्रालय ने कहा कि वर्ष 2014 में भारत-बांग्लादेश सीमा मुद्दे के समाधान के बाद 14,864 बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय नागरिकता दी गई थी।

उनके ‘एनक्लेव’ को भारतीय भूक्षेत्र में शामिल किए जाने के बाद ऐसा किया गया था। गृह मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान को छोड़ कर किसी अन्य देश में धर्म के आधार पर प्रताड़ित होने वाले हिंदू नये कानून का लाभ नहीं प्राप्त कर पाएंगे। उन्हें भारतीय नागरिकता हासिल करने के लिए सामान्य प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा। गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि नया कानून किसी भारतीय नागरिक पर लागू नहीं होता है।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘सभी भारतीय नागरिक संविधान में प्रदत्त मूल अधिकारों का लाभ उठाते रहेंगे। संशोधित कानून का उद्देश्य किसी भारतीय नागरिक को नागरिकता से वंचित करना नहीं है। इसके बजाय यह एक विशेष कानून है जो इन तीन पड़ोसी देशों में एक विशेष स्थिति का सामना करने वाले लोगों को भारतीय नागरिकता देगा।’’ मंत्रालय ने यह भी कहा कि संशोधित नागरिकता कानून का राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) से कोई लेना देना नहीं है। (भाषा)

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