
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पर सत्ता के दुरुपयोग तथा कांग्रेस में अवरोध डालने के आरोपों में महाभियोग का प्रस्ताव हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में पास हो गया. सत्ता के दुरुपयोग के आरोप में प्रस्ताव 197 के मुकाबले 229 मतों से पास हुआ है. इससे पहले ट्रंप ने प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैन्सी पेलोसी पर निशाना साधा था और डेमोक्रेट सांसदों पर अभूतपूर्व तथा असंवैधानिक तरीके से शक्तियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए खुद को ‘सत्ता परिवर्तन के अवैध, पक्षपातपूर्ण प्रयासों’ का शिकार बताया था. मतदान से कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने छह पन्नों के अपने संदेश में लिखा कि जब मतदाता अगले साल मतदान करेंगे तब डेमोक्रेटों को अपनी कोशिशों पर पछतावा होगा.
प्रतिनिधि सभा की न्यायिक समिति ने घंटों तक बहस के बाद पिछले सप्ताह ट्रंप के खिलाफ दो आरोपों को मंजूरी दी थी. पहला सत्ता का दुरुपयोग है जिसमें ट्रंप पर यूक्रेन पर 2020 के आम चुनावों में उनके संभावित राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी जो बिडेन को बदनाम करने के लिए दबाव बनाने का आरोप है. दूसरा आरोप ट्रंप पर महाभियोग मामले में सदन की जांच में सहयोग नहीं करने का है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बुधवार को ट्वीट किया था, ‘वे केवल राष्ट्रपति पर प्रभुत्व दिखाना चाहते हैं. उनका उचित जांच का कोई इरादा नहीं है. वे कोई अपराध नहीं खोज सके इसलिए सत्ता और कांग्रेस के दुरुपयोग का अस्पष्ट सा आरोप लगा दिया.’ उन्होंने जोर दिया कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है और चरमपंथी वाम पक्ष उन पर महाभियोग चलाना चाहता है.
ट्रंप ने कहा था, ‘किसी और राष्ट्रपति के साथ यह नहीं होना चाहिए. दुआ कीजिए. मुझे उम्मीद है कि महाभियोग को फिर कभी इतने हल्के में नहीं लिया जाएगा.’ ट्रंप ने मंगलवार को स्पीकर पेलोसी को लिखे एक पत्र में कहा, ‘महाभियोग डेमोक्रेट सांसदों के शक्ति के अप्रत्याशित एवं असंवैधानिक दुरुपयोग को दर्शाता है. अमेरिकी विधायी इतिहास की लगभग ढाई शताब्दी में कभी ऐसा नहीं हुआ.’
प्रतिनिधि सभा की न्यायिक समिति द्वारा पेश महाभियोग के अनुच्छेदों को संवैधानिक सिद्धांत, व्याख्या या न्यायशास्त्र के किसी भी मानक के तहत अयोग्य बताते हुए ट्रम्प ने कहा था कि इसमें किसी अपराध, दुष्कर्म और किसी अपराध का जिक्र नहीं है.
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