
पंडित दीनानाथ कौल का जन्म 18 मार्च 1916 में हुआ। 1986 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
नवोदय टाइम्स पर छपी खबर के अनुसार, आज जब बजट पेश करने के दौरान वित्त मंत्री ने जब उन की कविता बोली तब गुमनामी में छुपा यह नाम लोगों तक पहुंचा।
कश्मीरी कवि पंडित दीनानाथ कौल द्वारा रचित कविता के माध्यम से केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट सत्र को कुछ इस तरह संबोधित किया…
हमारा वतन डल लेक में खिलते हुए कमल जैसा
हमारा वतन नौजवानों के गरम खून जैसा
मेरा वतन, तेरा वतन, हमारा वतन
दुनिया का सबसे प्यारा वतन
कश्मीरी कवि पंडित दीनानाथ कौल को पारसी, हिन्दी, उर्दू और कश्मीरी भाषाओं का अच्छा ज्ञान था तभी उन्होंने पारसी, हिन्दी, उर्दू और कश्मीरी में साहित्य की रचना की।
उन्हें उनकी कविता कविता–संग्रह सुमरन के लिये 1956 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
पंडित दीनानाथ कौल को उनके दोस्त और परिवार वाले मास्टर जी के नाम से बुलाया करते थे। दरअसल वह अपने खाली वक्त में विद्यालय और घर पर कश्मीरी बच्चों को पढ़ाया करते थे।
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