भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की एक तस्वीर सोशल मीडिया में विस्तृत संदेश के साथ व्यापक रूप से साझा की गई है। संदेश में लिखा है-
“62 की पराजय के बाद जब नेहरू के चेहरे पर स्वामी विद्यानंद विदेह का थप्पड़ पड़ा (वास्तव में गां* पे लात)।
कारण : नेहरू ने अपने भाषण में कहा था कि आर्य भारत में शरणार्थी थे, यह सुनकर स्वामी जो मुख्य अतिथि भी थे, उठ कर मंच पर चढ़ गए और नेहरू को थप्पड़ मार दिया, उनसे माइक खींच लिया और कहा “आर्य शरणार्थी नहीं थे वे मेरे पूर्वज थे और वे भारत के मूल निवासी थे लेकिन आपके (नेहरू के पूर्वज) अरब वंश के थे और आपकी रगों में अरब रक्त प्रवाहित होता है, इसलिए आप वास्तव में इस महान देश के मूल निवासी नहीं हैं…यदि आपके बजाय सरदार पटेल पीएम होते तो हम इस तरह की खेदजनक स्थिति में नहीं होते”
From : (विदेह गाथा: एक आर्य संन्यासी की डायरी, पृष्ठ 637 संस्करण भाद्रपद 2037 विक्रमी…से साभार)
(बाद मे इन आर्य संन्यासी ने एक किताब लिखी नेहरू : उत्थान और पतन… जो 1963 मे बैन हो गई थी।)
तस्वीर : थप्पड़ मारे जाने के बाद नेहरू ने बदला लेने की कोशिश की मगर उन्हें पीछे कर दिया गया”
When Nehru got a slap on the face ( virtual gan* pe laat ) by Swami Vidyanand Videh post 62 debacle .
Reason : Nehru in…Posted by Kannan Ramasamy on Thursday, 19 September 2019
यह तस्वीर समान दावे के साथ फेसबुक पर कई व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट किया गया हैं। संदेश में किया गया दावा कि नेहरू को 1962 में, जब उन्होंने एक भाषण में कहा था कि “आर्य भारत में शरणार्थी थे”। मुख्य अतिथि और वैदिक विद्वान स्वामी विद्यानंद विदेह द्वारा उन्हें प्रत्यक्ष रूप से थप्पड़ मारा गया था, जिन्होंने नेहरू की टिप्पणी पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि आर्य भारत के मूल निवासी हैं, और यह नेहरू हैं जिनकी रगों में अरब रक्त है। आगे यह उल्लेख किया गया है कि स्वामी द्वारा लिखी गई पुस्तक में इसका ज़िक्र है।

यही दावा ट्विटर पर किया गया है। ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि यह संदेश 2016 में एक ब्लॉग में प्रकाशित किया गया था।
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When Nehru got a slap on the face (virtual gan*pe laat) by Swami Vidyanand Videh post 62 debacle.
Reason:Nehru in his speech had said “Aryas were refugees in India”, hearing this Swami who was also the Chief guest got up went up 2 the stage and slapped Nehru,pulled d mike
1/3 pic.twitter.com/y6pDsH54jq— G V Nair🇮🇳NaMo🙏 (@gvnair91) September 18, 2019
तथ्य-जांच
सोशल मीडिया का दावा और इसके साथ दी गई तस्वीर दोनों गलत हैं। ऑल्ट न्यूज़ ने जवाहरलाल नेहरू की इस तस्वीर की पहले भी तथ्य-जाँच की थी, जिसमें उन्हें पीछे से पकड़ा हुआ दिखाई दे रहा हैं, जब इसे 1962 और चीन-भारत युद्ध का हवाला देते हुए एक झूठे दावे के साथ प्रसारित किया गया था।
1962 की घटना की अलग तस्वीर
हालांकि यह सच है कि यह तस्वीर 1962 की है, लेकिन यह किसी भी तरह से चीन-भारत युद्ध या उसके बाद के राजनीतिक प्रभावों से संबंधित नहीं है। तस्वीर को गूगल पर रिवर्स-सर्च करके ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि यह 2014 में प्रकाशित आउटलुक पत्रिका के एक लेख में छपी थी। इस तस्वीर को कैप्शन दिया गया था, ‘अत्यंत बुरी स्थिति से बचाव: 1962 में युद्ध से पहले एक दंगाई भीड़ में घुसने से रोके गए नेहरू’-अनुवाद। तस्वीर का श्रेय एसोसिएटेड प्रेस (AP) को दिया गया था।
एसोसिएटेड प्रेस के आर्काइव में ‘नेहरू 1962’ कीवर्ड्स के साथ खोज करते हुए, ऑल्ट न्यूज़ को यह तस्वीर और इसका मूल वर्णन भी मिला- “एक सुरक्षाकर्मी ने भारतीय प्रधानमंत्री नेहरू को कांग्रेस पार्टी की एक सभा में दंगाई भीड़ में घुसने से बचाने के लिए उन्हें पकड़ा, पटना, भारत, जनवरी 1962। इस वर्ष के बाद में, भारत पर कम्युनिस्ट चीन के हमले ने नेहरू को नई मुसीबतों में डाल दिया।” इसका मतलब है कि यह तस्वीर 1962 के भारत-चीन युद्ध से पहले ली गई थी।

जनवरी 1962 में ली गई तस्वीर
ऑल्ट न्यूज़ ने जनवरी 1962 के अख़बारों की खबरें देखीं और पाया कि यह तस्वीर पटना में कांग्रेस के अधिवेशन में ली गई थी, जिसका आयोजन जनवरी, 1962 में हुआ था। पूर्ण सत्र में भीड़ काफी बढ़ गई थी, और प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए भीड़ मंच के क़रीब आयी, परिणामस्वरूप वहा पर भगदड़ मच गयी। यह तस्वीर उस समय ली गई थी जब “खुद से व्यवस्था बहाल करने के प्रयास” में लगे नेहरू को, भीड़ में जाने से बचाने के लिए, उन्हें सुरक्षाकर्मियों द्वारा रोक दिया गया था।

इसके अलावा, ऑल्ट न्यूज़ को संदेश में उल्लिखित संदर्भों — विदेह गाथा: एक आर्य संन्यासी की डायरी और नेहरू : उत्थान और पतन — नाम की दोनों किताबों का कोई निशान नहीं मिला।
ऑल्ट न्यूज़ ने इस तस्वीर की पहले तथ्य-जाँच की थी, जब इसे, 1962 के युद्ध में असफल होने के बाद नेहरू को भीड़ द्वारा पीटे जाने की झूठी कहानी के साथ,साझा किया गया था। उल्लेखनीय है कि यह तस्वीर जनवरी 1962 में ली गई थी, जबकि चीन-भारत युद्ध उस साल अक्टूबर में हुआ था। यह तस्वीर एक और झूठे दावे के साथ प्रसारित की गई थी कि नेहरू 1946 में कश्मीर में गिरफ्तार किए गए क्योंकि उन्होंने वीज़ा के बिना प्रवेश करने का प्रयास किया था।
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