
सुप्रीम कोर्ट में आज रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर एक बार फिर सुनवाई हुई। रोजाना सुनवाई का आज 30वां दिन है और मुस्लिम पक्ष की तरफ से वकील राजीव धवन ने अदालत में दलीलें पेश की। इससे पहले हिंदू पक्ष की ओर से निर्मोही अखाड़ा, हिंदू महासभा के वकील पक्ष रख चुके हैं।
खास खबर पर छपी खबर के अनुसार, मंगलवार को राजीव धवन की ओर से दलीलें पूरी हुईं और बाद में जफरयाब जिलानी ने अपना पक्ष रखा। कोर्ट में जफरयाब जिलानी ने कहा कि हिंदू 1886 में पूजा का अधिकार मिलने के बाद ही मंदिर बनाना चाहते थे, लेकिन कोर्ट से इजाजत नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि एक गवाह ने दशरथ महल में रामजन्म होने का जिक्र किया, लेकिन महल की स्थिति का पता नहीं है।
इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि गवाहों ने शास्त्रों का हवाला देते हुए सीताकूप के अग्निकोण में 200 कदम दूर राम का जन्मस्थान बताया जा रहा है।
मुस्लिम पक्ष की ओर से जफरयाब जिलानी ने नक्शा बताते हुए कहा कि जन्मस्थान और सीता कूप के उत्तर दक्षिण का भी ज़िक्र किया गया है लेकिन इसमें जन्मस्थान मन्दिर को माना जा रहा है। फिर हिंदुओं ने अपना विश्वास बदल दिया और दोनों जगहों पर दावा जताने लगे।
जफरयाब जिलानी ने गवाह के बयान का हवाला देते हुए कहा कि सुमित्रा भवन, कौशल्या भवन और कैकई भवन का रामचरितमानस में जिक्र नहीं है। राजा टोडरमल गोस्वामी तुलसीदास के मित्र थे लेकिन तुलसीदास ने इसका जिक्र रामचरित मानस में नहीं किया है।
मुस्लिम पक्ष की ओर से जफरयाब जिलानी ने आगे कहा कि 1886 के फैसले में भी यही कहा गया है कि चबूतरा ही जन्मस्थान है, लेकिन बाद में हिंदू पक्ष की ओर से आंतरिक अहाते और गुंबद पर दावा करना प्रारंभ कर दिया। जस्टिस बोबड़े ने इस पर पूछा कि आप मानते हैं कि इस फैसले को चुनौती नहीं दी गई? जिलानी ने जवाब दिया कि हमने इसपर चुनौती नहीं दी, बाद में कई याचिका शामिल हुई।
सुप्रीम कोर्ट में जफरयाब जिलानी ने रामानंदचार्य, रामभद्राचार्य का उदाहरण देते हुए कहा कि मानस टीका में अवधपुरी का भी जिक्र है, किसी स्थान का नहीं।
उन्होंने कोर्ट में कहा कि स्कन्दपुराण के अयोध्या खण्ड में राम जन्मस्थान को लेकर चौहदी और दूरी का ज़िक्र है। लेकिन अब वो जगह नहीं मिल रही जिसका जिक्र पुराण में है।
इस पर जस्टिस बोबड़े ने कहा कि अयोध्या में रामजन्म को लेकर आपका विवाद नहीं है, सिर्फ जन्मस्थान को लेकर है? इसपर जिलानी ने कहा कि जी हां। इसके आगे जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि आप रामचबूतरे को रामजन्मस्थान मानते हैं? इस पर जिलानी की ओर से हां में जवाब दिया ।
जफरयाब जिलानी ने कहा कि पहले सभी यही मानते थे, स्कंदपुराण में जन्मस्थान का जिक्र है लेकिन अब वह अस्तित्व में नहीं है। उन्होंने कहा कि 1886 में जिला जज ने भी अपने फैसले में रामचबूतरा को जन्मस्थान मानते हुए वहां पूजा करने की इजाज़त दी थी।
जिलानी ने कहा कि जन्मस्थल पर रामजन्म को लेकर विश्वास तो है, लेकिन सबूत कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि दलीलों पर तीन आधार दिए गए हैं, राम चरित मानस, वाल्मीकि रामायण भी इनमें शामिल हैं।
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