उबैद बाहुसैन,पुने
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महाराष्ट्र में असदउद्दीन उवैसी ने प्रकाश अंबेडकर के साथ लोक सभा इंतिख़ाबात के लिए इत्तिहाद कर एक नया सयासी मुतबादिल महाराष्ट्र की अवाम के लिए फ़राहम किया था। इसी पेश-रफ़्त में 23मुस्लिम कार्पोरटरस और 20 फ़ीसद के क़रीब मुस्लिम आबादी वाली नांदेड़ की लोक सभा नशिस्त पर प्रकाश अंबेडकर की जानिब से सीधे मालेगाव यात्रा के मैदान में हुई इंतिख़ाबी मीटिंग में प्रोफ़ैसर यशपाल भुनगे के नाम का ऐलान किया गया।इस ऐलान को सुनते ही मौक़ा पर मौजूद मजलिसी कारकुनान एक दम हैरान हो गए। जिसके बाद उन्हें मजलिस के रियास्ती क़ियादत की जानिब से ये तयक़्क़ुन दिलाया गया था के अनक़रीब औरंगाबाद की लोक सभा नशिस्त से मजलिस किसी मुस्लिम उम्मीदवार को मौक़ा देगी। लेकिन अचानक से प्रकाश अंबेडकर की पार्टी के सोशल मीडीया सफ़हात पर से औरंगाबाद की लोक सभा नशिस्त के लिए अहमद नगर से ताल्लुक़ रखने वाले और पौने में मुक़ीमजस्टिस कोलसे पाटल की उम्मीद-वारी का ऐलान किया गया।
जिस तरह से नांदेड़ में हुआ था इसी तरह से ये सब माजरा देख मजलिस के कारकुनान और हामीयों में नाराज़गी की लहर दौड़ गई। सिर्फ मुस्लमान ही नहीं कोलसे पाटल की उम्मीद वराए के मंज़र-ए-आम पर आते ही औरंगाबाद के दलित तबक़े के नौजवान भी हैरानी का इज़हार कर रहे हैं। सबसे अहम बात ये है के औरंगाबाद से ताल्लुक़ रखने वाले मजलिसी मैंबर आफ़ असैंबली इमतियाज़ जलील जो के सोशल मीडीया हर काफ़ी सरगर्म रहते है उनकी जानिब से इस उम्मीद-वारी के ऐलान पर 24घंटे होजाने पर भी कोई तबसरा नहीं दिया गया। असद उद्दीन साहिब उस वक़्त अमरीका के दौरा पर गए हुए हैं और इसी दरमयान औरंगाबाद जैसी अहम लोक सभा नशिस्त के लिए उम्मीद-वारी का इज़हार मजलिसकी रजामंदी के बग़ैर होजाने और इमतियाज़ जलील की ख़ामोशी से बहुत से सवाल उठने लाज़िमी हैं। क्या मजलिसऔर भारीप में ना इत्तिफ़ाक़ी की शुरूआत हो चुकी है ? क्या मजलिस ने अपने आपको लोक सभा इंतिख़ाबात से दूर कर लिया है ?
समाजी और सयासी फ़िक्र रखने वाले अफ़राद की नज़र में जिस तरह से प्रकाश अंबेडकर की जानिब से उम्मीदवारों का ऐलान किया जार हा है इस पर एक बात बाज़गश्त कर रही के क्या वंचित आघाड़ी में मुस्लमान अधिक वनचीत हो जाएंगे? देखना ये होगा के इस मामले पर मजलिस की जानिब से अनक़रीब किया रद्द-ए-अमल आता है.
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