
इस्राईल में सैन्य मामलों के विशेषज्ञ ने, इस्राईली समाचार पत्र हारित्ज़ से एक वार्ता में बताया है कि ईरान व अमरीका के मध्य लगभग गत दो महीनों से तनाव में वृद्धि के बाद अरब देशों ने तेहरान के खिलाफ अमरीकी प्रतिबंधों में कड़ाई के लिए प्रयास किया इसके साथ ही इस्राईली और अमरीकी खुफिया एजेन्सी के अधिकारियों ने बताया है कि, ईरान के खिलाफ सैनिक कार्यवाही से ट्रम्प का इन्कार इस बात का कारण बना कि अरब देश, ईरान के खिलाफ बने मोर्चे से अधिक कटिबद्ध न रहें।
इस्राईली समाचार पत्र हारित्ज़ के अनुसार, सूत्रों ने यह भी बताया है कि सऊदी क्राउन प्रिंस, मुहम्मद बिन सलमान और सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन ज़ायद ने हालयि वर्षों में निरंतरता के साथ अमरीका पर ईरान पर हमले के लिए तैयार करने की कोशिश की और इस संदर्भ में इन दोनों ने खुफिया तौर पर इस्राईल के साथ सहमति बना ली थी लेकिन हालिया हफ्तों में यूएई के व्यवहार में बड़ा बदलाव पैदा हो गया।
इस इस्राईली टीकाकार ने बताया कि इस्राईल में अब यह समझा जा रहा है कि यूएई यमन युद्ध में अपनी भागीदारी रोकने का मन बना चुका है और हौसियों ने भी एलान कर दिया है कि वह यूएई पर हमला नहीं करेंगे क्योंकि उसकी नीति में बदलाव आ गया है इस दशा में यमन के रणक्षेत्र में सऊदी अरब, सूडान सहित कुछ देशों के किराये के सैनिकों के साथ अकेला खड़ा नज़र आ रहा है जबकि तेहरान और अबूधाबी के संबधों में तेज़ी के साथ सुधार हो रहा है और हो सकता है कि ईरान के संबंध सऊदी अरब से भी अच्छे हो जाएं।
इस्राईली समाचार पत्र हारित्ज़ के इस लेख में लिखा है कि हालिया हफ्तों में फार्स की खाड़ी में अचानक तनाव में वृद्धि के बाद, वाशिंग्टन ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया और ट्रम्प ने यह साफ कर दिया कि वह फार्स की खाड़ी में एक और युद्ध नहीं चाहते बल्कि वह परमाणु समझौते में अमरीका की वापसी के लिए बड़ी और कठिकन मांगों पर ईरान के साथ वार्ता का प्रयास कर रहे हैं।
पार्स टुडे डॉट कॉम के अनुसार, इस्राईली टीकाकार ने लिखा है कि न्यूयार्क टाइम्ज़ ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि ईरानी विदेशमंत्री ने परमाणु मुद्दे पर वार्ता के अमरीकी प्रस्ताव को ठुकरा दिया जिसके बाद इस्राईल की यह आशंका उसे अधिक परेशान करने लगी है कि कहीं अमरीका और ईरान में वार्ता फिर से आरंभ न हो जाए।
इस्राईली समाचार पत्र ने लिखा है कि अमरीकी सरकार की ओर से बयान खूब दिये जाते हैं किंतु व्यवहारिक रूप से क़दम उठाया जाना कठिन होता है और ईरान को बार बार धमकियां देने के बावजूद ट्रम्प की सरकार ईरान के साथ वार्ता के लिए प्रयास कर रही है
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