काल्पनिक कहानी: “नेल्लोर में मुस्लिम लड़का ‘हिन्दू जैन’ लड़की को लेकर भागा”

कई लोग सोशल मीडिया पर एक लिखित संदेश साझा कर रहे हैं जो कहता है कि, “नेल्लोर में एक ‘हिंदु जैन’ लड़की को एक मुस्लिम लड़का लेकर भाग गया, जिसके बाद जैन समाज़ ने तय किया कि पूरे ज़िले में सभी मुसलमानों को नौकरी से निकाल दिया जायेगा।’ संदेश के अनुसार लगभग दस हज़ार मुसलमानों ने अपनी नौकरी खो दी, और नौ घंटों में लड़की को लौटा दिया गया। संदेश ये बताते हुए खत्म होता कि ‘जब एक समुदाय एकजुट हो जाता है तो क्या कुछ हासिल कर सकता है।”

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एक ट्विटर उपयोगकर्ता @vimal043, जिनके फॉलोअर्स में भारत के कैबिनेट मंत्री पीयूष गोयल @PiyushGoyalOffc भी शामिल हैं, ने दिसंबर 27, 2019 को अपने ट्वीट में जो लिखा उसका हिंदी अनुवाद कुछ इस प्रकार है- “हाल ही में एक हिंदू जैन लड़की को आंध्र प्रदेश राज्य के नेल्लोर जिले में एक मुस्लिम लड़के द्वारा शादी के लिए ले जाया गया, सभी जैन समुदाय के सदस्यों की जिले में एक बैठक हुई और सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि वे सभी मुस्लिम कर्मचारियों को अपने वाणिज्यिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों से तत्काल प्रभाव सेसमाप्त निकाल देंगे। परिणाम चौंकाने वाला था, क्योंकि 10,000 से अधिक मुसलमानों ने अपना रोजगार खो दिया, इसलिए उनके समुदाय के बुजुर्गों, धार्मिक और सामुदायिक नेताओं ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई और जैन लड़की का पता लगाने और उसे उसके परिवार को सौंपने का फैसला किया। घटना के नौ घंटों के भीतर लड़की का पता लगाया गया और उसे परिवार के हवाले कर दिया गया, इसे एक संयुक्त समुदाय की सख्त कार्रवाई द्वारा प्रभावी विजय कहा जाता है। नेल्लोर जिले में जैन समुदाय के सदस्यों को सलाम।”

इस लेख के लिखे जाने तक @vimal043 का उपरोक्त संदेश ट्विटर से मिटाया जा चुका है, लेकिन पाठक इस संदेश को यहाँ देख सकते हैं : http://archive.is/UbdrQ

कई लोगों ने फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सप्प पर इसी तरह की टिपण्णी करी।

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जांच करने पर ये सामने आया की कुछ इसी तरह के संदेश इसी वर्ष जुलाई और अगस्त माह में भी बहुत लोगों द्वारा साझा किये गए थे:

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झूठा दावा

सबसे पहला संकेत जो इस कहानी के काल्पनिक होने की तरफ़ इशारा करता है, वो लड़की के संदर्भ ‘जैन-हिंदु’ शब्द का प्रयोग है। ‘हिंदु’ और ‘जैन’ धर्म दो अलग-अलग धर्म हैं। ऑल्ट न्यूज़ ने नेल्लोर पुलिस जन संपर्क कार्यालय में इंस्पेक्टर बी. श्रीनिवास रेड्डी से संपर्क किया, जिन्होंने कहा, “वायरल संदेश में किया गया मनगढंत दावा दो समुदायों के बीच मतभेद पैदा करने के उद्देश्य से किया गया है।” 28 दिसंबर को, नेल्लोर पुलिस ने इस संदर्भ में एक प्रतिउत्तर दाखिल किया, जिसमें कहा गया है कि उपरोक्त वायरल संदेश पूरी तरह झूठा है और साथ ही चेतावनी भी दी कि इस तरह के झूठे दावों को फ़ैलाने वालों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किये जायेंगे।

इंस्पेक्टर रेड्डी ने बताया कि पुलिस की जांच पड़ताल में पता चला कि ये संदेश सबसे पहले मुंबई और अहमदाबाद से भेजे गए और इस संदर्भ में अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। उन्होंने ये भी बताया कि इसी तरह का एक संदेश अगस्त 2019 में भी साझा किया गया था, जो कि हिंदी भाषा में था लेकिन हूबहू इसी संदेश जैसा था, सिवाय इसके कि उस संदेश के मुताबिक 550 जैन व्यापारियों ने 1800 मुस्लिम कर्मचारियों को निकाल दिया था।

संपूर्ण संदेश कुछ इस प्रकार है :
“नेल्लोर में एक मुस्लिम ने जैन लड़की को फुसलाकर भगा ले गया , सुबह को और दोपहर को समाज की बैठक हुई 550 जैन दुकानों से फैक्टरी से मुस्लिम को कह दिया तुम अभी से ही नोकरी से छुट्टी है। थोड़ी देर बाद सब समाज ने एक के बाद एक जैन समाज को सपोर्ट दिया ,शाम तक 1800 मुसलमान की नोकरियों पे नौबत आ गई तो मुस्लिम समाज उस लड़की को उसके घर सही सलामत छोड़कर आये और मुस्लिम लड़को को कह दिया की गलती से भी हिन्दू लड़की को जैन लड़की को ना देखे ये होती है एकता की ताकत अभी भी कुछ थर्ड क्लास दयालु कृपालु कम दिमाग वाले सेक्युलर डरपोक अभी भी हमे सलाह दे रहे है की इनलोगो से झगड़ा मोल नही लेने का !!! अभी तो वक्त है ये लोगो ने हमे मौका दिया है एकजुटता दिखाने का”

निष्कर्ष

यह दावा कि आंध्रप्रदेश के नेल्लोर में मुस्लिम लड़का एक हिन्दु-जैन लड़की को साथ लेकर भागा, जिसके बाद जैन समुदाय ने मुस्लिमों को नौकरी से निकाला और नौ घंटे में लड़की वापस घर पहुँच गयी, झूठा पाया गया है। नेल्लोर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है और वायरल संदेश सांप्रदायिक मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहा है।

 

अनुवाद: अंकित जैन 

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