ई-टिकटिंग घोटाले में आरपीएफ ने कई और लोगों को दबोचा, आरोपियों के आंतकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन से संबंध

रेलवे पुलिस ई-टिकटिंग के गैर कानूनी रूप से बिक्री के खिलाफ लगातार दबिश दे रही है। इस सिलसिले में अब तक 59 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं अब रेलवे का कहना है कि उसने सात और लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी कोलकाता, जोधपुर, दिल्ली, लखनऊ, अहमदाबाद, मुम्बई, बेंगलुरू और शिलांग से हुई है। रेलवे ने दावा किया है कि अब गैरकानूनी सॉफ्टवेयर से एक भी टिकट नही बेचा जा रहा है।

दिल्ली में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के डीजी अरुण कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को सबोधित करत्ते हुए कहा कि राजू पोद्दार नामक एक शख्स को कोलकाता से गिरफ्तार किया गया है, जो पश्चिम बंगाल के नादिया जिले का रहने वाला है। राजू ने माना है कि उसके बांग्लादेश के आंतकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन से संबंध रहे हैं। वह अवैध एएनएमएस सॉफ्टवेयर का प्रमुख विक्रेता था और पशु तस्करों, नकली मुद्रा संचालकों और फर्जी पासपोट और आधार कार्ड बनाने वालों के संपर्क में था।

राजू ने पूछताछ में कबूला कि वह राजेश यादव नाम के एक शख्स से सपंर्क में था, जो जमात-उल-मुजाहिदीन का सदस्य है और इस खेल का सरगना भी है। राजेश यादव अभी तक 23 करोड़ रुपये के फर्जी टिकट बेच चुका है।

राजेश यादव को मुंबई से गिरफ्तार किया गया, जो शमशेर के लिए फंड मैनेज करने का काम करता था। शमशेर ने सिफा एंटरप्राइजेज नाम से एक कंपनी बना रखी थी, जिसके जरिए पांच करोड़ रुपये की ई-टिकटिंग की गई। राजेश ने वाईफाई सल्यूशंस नामक कंपनी बनाई थी।

आरपीएफ के अनुसार, जांच के दौरान पाया गया कि पोद्दार ने हर्मिश आई-टिकट लिमिटेड के स्वामित्व वाले एक मोबाइल वॉलेट स्मार्ट शॉप के जरिए पैसे हस्तांतरित किए थे।

इसके साथ ही मुंबई से सत्यवान उपाध्याय को गिरफ्तार किया गया है, जो गैरकानूनी सॉफ्टवेयर का जनक था। ये मेक सॉफ्टवेयर नाम का सॉफ्टवेयर बेचा करता था। अब तक वो 235 सॉफ्टवेयर लोगों को बेच चुका है। इसने ही इस धंधे के मुख्य साजिशकर्ता हामिद को दो करोड़ रुपये अपने स्मार्टफोन से ट्रांसफर किए थे।

मेक साफ्टवेयर के जरिए 4493 टिकटों को बेचा गया। जिसका मार्केट वैल्यू 1.30 करोड़ के आसपास है। रेलवे ने सूरत से एक एजेंट अमित प्रजापति को भी गिरफ्तार किया है, जिसने 2.59 करोड़ रुपये के 37795 टिकट बेचे हैं।

गौरतलब है कि आरपीएफ ने 22 जनवरी को रेलवे में ई-टिकटों की गैरकानूनी बिक्री के ऐसे अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था, जिसके तार दुबई, पाकिस्तान, बांग्लादेश, सिंगापुर और यूगोस्लाविया में हवाला, मनी लॉन्ड्रिंग तथा आतंकी फंडिंग से जुड़े हैं।

आरपीएफ ने दावा किया था कि इसका सरगना दुबई में बैठा है, जबकि भारत में बैंगलुरू से इसका संचालन होता है। इस सिलसिले में एजेंसियों ने ई-टिकट बुकिंग सॉफ्टवेयर बेचने वाले गुलाम मुस्तफा समेत 27 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए आइबी और एनआईए ने भी इसकी जांच शुरू कर दी है।

भुवनेश्वर से गिरफ्तार गुलाम मुस्तफा ने अपने धंधे की शुरुआत 2015 में आइआरसीटीसी के एजेंट के रूप में की थी। बाद में भारत से दुबई गए हामिद अशरफ के संपर्क में आकर इसने ई-टिकटों की गैरकानूनी बिक्री का काम शुरू कर दिया। आरपीएफ द्वारा बेंगलुरू में मारे गए छापों में बार बार गुलाम मुस्तफा का नाम सामने आ रहा था। इसलिए ट्रैकिंग कर इसे गिरफ्तार किया गया।

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