
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नेशनल कॉन्फेंस अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला को लेकर कहा कि उनको सिर्फ सुरक्षा की दृष्टि से नजरबंद रखा गया है। दो साल तक हिरासत में रखने की कोई बात ही नहीं है।
स्थानीय नेताओं को नजरबंद रखने के सवाल पर अमित शाह ने कहा- कश्मीर में 40 हजार पंच-सरपंच हैं जो स्थानीय नेतृत्व कर रहे हैं। दो परिवार ज्यादा लोगों की भावनाओं को समझेंगे या 40 हजार लोग। तो ऐसा नहीं है कि कश्मीर के लोगों के पास अपनी बात रखने के लिए कोई नेता नहीं है।
वहीँ अमित शाह ने कहा- जब से धारा 370 हिंदुस्तान का हिस्सा बनी थी, तभी से हम मांग करते रहे हैं कि धारा 370 अस्थाई है, उसको हटा दिया जाए। हमारी तैयारी भी उसी दिन से चल रही थी। हमारे एजेंडे में तो ये शुरू से था। जब नहीं हो रहा था तो आप सवाल करते थे, धारा 370 का क्या कर रहे हैं और जब हमने हटा दिया तो उल्टे फिर आप ही सवाल कर रहे हो कैसे हटा दिया
कश्मीर के 196 में से सिर्फ 8 पुलिस क्षेत्रों के अंदर धारा 144 लागू है और कहीं ऐसा नहीं हो रहा है। जम्मू-कश्मीर में कोई पाबंदी नहीं है। मानव अधिकारों को मोबाइल व इंटरनेट पर पाबंदी से जोड़कर देखना गलता है। पाकिस्तान की बात यहां रखना गलत है। कश्मीर भारत का हिस्सा है। इसे लेकर भारतीय संसद को निर्णय लेने का अधिकार है। इसे लेकर कोई युद्ध की स्थिति नहीं है। पूरा विश्व कश्मीर को लेकर भारत के साथ है। विश्व समझता है कि सरहद पार से आने वाले आतंकवाद में पाकिस्तान का बड़ा रोल है।
Syndicated Feed from hindi.siasat.com Original Link- Source